-यशकुमार
भारतीय टीम ने नॉटिंगम में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली पारी में 481 रन बनाए, जिसमें कोई शतक नहीं थी, अलबत्ता पाँच अर्धशतकें जरूर थीं। सर्वाधिक 91 रन बनाए थे सचिन तेंडुलकर ने, दिनेश कार्तिक के 77, वसीम जाफर के 62, सौरव गांगुली के 79 और वीवीएस लक्ष्मण के 54 नाबाद रन थे।
भारत के टेस्ट इतिहास में यह नौवाँ अवसर है, जब टीम ने अपनी पारी 425 या अधिक रनों की गढ़ी, पर उसमें किसी बल्लेबाज की शतक नहीं थी। नॉटिंगम की पारी इस संदर्भ में तीसरी श्रेष्ठ पारी है।
इन मैचों में कुल मिलाकर 39 अर्धशतकें भारतीय बल्लेबाजों द्वारा बनाई गईं, पर शतक एक भी नहीं रही। 1977-78 में ऑस्ट्रेलिया (एडिलेड) तथा 78-79 पाकिस्तान (लाहौर) के खिलाफ भारत को पराजय मिली, 2000-01 में बांग्लादेश (ढाका) और 2007 में इंग्लैंड (नॉटिंगम) को हमने हराया। शेष पाँच टेस्ट ड्रॉ रहे।
कुछ विशिष्टताएँ इन मैचों की : 1960-61 में पाकिस्तान के विरुद्ध भारत ने 9 विकेट पर 449 रन बनाकर पारी घोषित की थी। 300 पर 8 विकेट गिर चुके थे, पर नौवें क्रम पर विकेट कीपर पीजी जोशी (52*) तथा दसवें क्रम पर रमाकांत देसाई (85) ने अपने बीच नौवें विकेट के लिए 149 रनों की कीर्तिमान साझेदारी की थी।
1976-77 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बंबई टेस्ट में भारतीय पारी में अतिरिक्त रनों के साथ-साथ सभी बल्लेबाजों की रन संख्या दहाई में थी, इनमें 6 बल्लेबाजों की अर्धशतकें थीं।
77-78 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में चंद्रशेखर को छोड़कर सभी, 79-80 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ (मद्रास) और 2000-01 में बांग्लादेश (ढाका) के खिलाफ श्रीनाथ एवं जहीर खान को छोड़कर शेष सभी बल्लेबाजों का स्कोर दहाई में था।
बगैर शतक के 425 या अधिक रनों की भारतीय पारियाँ
* 524/9 घोषित वि. न्यूजीलैंड, कानपुर 76-77, सर्वाधिक एम. अमरनाथ 70
* 485 वि. श्रीलंका, नागपुर 97-98, सौरव गांगुली 99
* 481 वि. इंग्लैंड, नॉटिंगम 2007, सचिन तेंडुलकर 91
* 465 वि. पाकिस्तान, लाहौर 78-79, सुनील गावसकर 97
* 449/9 वि. पाकिस्तान, बंबई 60-61, रमाकांत देसाई 85
* 445 वि. ऑस्ट्ेलिया, एडिलेड 77-78, एम. अमरनाथ 86
* 445 वि. ऑस्ट्रेलिया, मेलबोर्न 85-86, के. श्रीकांत 86
* 429 वि. बांग्लादेश, ढाका 00-01, सुनील जोशी 92
* 425 वि. ऑस्ट्रेलिया, मद्रास 79-80, कपिल देव 83