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क्या नासा को एक बाह्य ग्रह पर जीवन के संकेत मिले हैं?

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राम यादव

बॉन , सोमवार, 29 जनवरी 2024 (16:30 IST)
NASA Life on Exoplanate : अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 'नासा' (NASA) के सबसे शक्तिशाली नवीनतम अंतरिक्ष दूरदर्शी (टेलीस्कोप) जेम्स वेब को पृथ्वी से इतर अंतरिक्ष की गहराइयों में जीवन होने का साक्ष्य मिला है। नासा की ओर से इन अटकलों का न तो स्पष्ट रूप से खंडन किया गया है और न मंडन।
 
तकनीकी विषयों पर ब्लॉग के एक नामी वेब पोर्टल 'आर्स टेक्निका' (ArsTechnica) की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में नासा ने बताया कि जेम्स वेब को 'किसी बाह्य ग्रह (एक्सोप्लैनेट) पर जीवन का कोई निश्चित सबूत नहीं मिला है।' हालांकि दूसरी ओर यह भी माना जाता है कि जेम्स वेब दूरदर्शी के अवलोकनों की सहायता से संभावित जैव चिन्हों (बायो सिग्नेचर) का पता लगाया जा सकता है।
 
कोई पुष्टि नहीं है: नासा का उत्तर कोई पुष्टि नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह से कोई खंडन भी नहीं है। इससे अटकलों के और अधिक बढ़ने की ही संभावना बन गई है। अटकलों की शुरुआत नववर्ष की पूर्व संध्या के BBC के एक प्रसारण में ब्रिटिश खगोलशास्त्री मैगी एडरिन-पोकॉक के एक बयान से हुई थी। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2024 में पृथ्वी से इतर एक बाह्य ग्रह पर जीवन होने की खोज हो जाएगी।
 
मैगी एडरिन-पोकॉक की भविष्यवाणी और ब्रिटेन के ही एक अंतरिक्ष यात्री रहे खगोल भौतिकीविद् टिम पीक के इसी तरह के बयानों के आधार पर कुछ दिन पहले अखबार 'द स्पेक्टेटर' ने अपनी एक रिपोर्ट को फड़कता हुआ शीर्षक दिया, 'क्या हमने अभी-अभी एलियंस की खोज की है?'
 
कोई खंडन भी नहीं: 'आर्स टेक्निका' ने इस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए सीधे नासा से पूछा कि उसका क्या कहना है? उत्तर अंतरिक्ष दूरदर्शी जेम्स वेब से जुड़ी एक ऐसी महिला शोधकर्ता की ओर से आया, जो इन रिपोर्टों का पूरी तरह से खंडन नहीं करना चाहती थी। उसने कोई ठोस या भरोसेमंद प्रमाण मिला होने से इंकार किया, पर साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि इस आशय का कोई 'बायोसिग्नेचर' शायद जल्द ही मिल भी जाए। इसी के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कोई रोमांचक खोज हुई है और अब उसकी विशेष रूप से गहन जांच-परख चल रही है।
 
यह सारी उत्सुकता और जिज्ञासा बाह्य ग्रह K2-18 b को लेकर है जिसके बारे में माना जाता है कि जीवन की उत्पत्ति की दृष्टि से वह पहले से ही काफ़ी आशाजनक लग रहा है। सितंबर, 2023 में ही ज्ञात हो गया था कि K2-18 b के वायुमंडल में संभवत: एक ऐसे पदार्थ का निशान मिला है, जो पृथ्वी पर केवल जीव-जंतुओं द्वारा पैदा होता। इस पदार्थ को डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS या C2H6S) कहा जाता है।
 
डाइमिथाइल सल्फाइड: यह यौगिक पृथ्वी पर केवल जीवित चीजों द्वारा निर्मित होता है। हमारे सागरों-महासागरों में भी अनगिनत प्रकार के जीव-जंतु हैं इसीलिए इन जीव-जंतुओं के कारण बनने वाले इस यौगिक की एक विशेष प्रकार की गंध हमारे सागरों-महासगरों में भी रसी-बसी हुई है।
 
अत: अनुमान लगाया जा सकता है कि बाह्य ग्रह K2-18 b पर भी यदि इसी प्रकार की गंध वाले डाइमिथाइल सल्फाइड के संकेत मिले हैं तो संभव है कि वहां भी किसी-न-किसी प्रकार का जीवन पनप रहा हो। यह संकेत बहुत रोमांचक तो लगता है, पर जब तक उसकी पुष्टि न हो जाए, हमें प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
 
जीवन के हैं अनगिनत रूप: इतना तो निश्चित है कि अरबों ग्रहों और सौर मंडलों वाली हमारी अपनी ही आकाशगंगा में यह हो नहीं सकता कि केवल हमारी पृथ्वी पर ही जीवन है या पृथ्वी से इतर कहीं और जीवन हो ही नहीं सकता। जीवन होने का यह अर्थ भी कतई नहीं है कि अन्य सौर मंडलों के ग्रहों पर भी पृथ्वी पर के हम मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और कीट-पतंगों जैसे ही जीवधारी होंगे। अन्य ग्रहों पर के जीवधारी हमारी कल्पनाओं से परे बिलकुल दूसरे व अनजान क़िस्म के जीव-जंतु भी हो सकते हैं।
 
K2-18 b कहलाने वाला बाह्य ग्रह किसी तारे के जीवन की उत्पत्ति योग्य अनुकूल क्षेत्र में अब तक मिला पहला ऐसा एक्सोप्लैनेट है, जहां बड़ी मात्रा में पानी होने का भी पता चला है। सिद्धांतत: यह पानी वहां तरल अवस्था में भी हो सकता है। यह खोज 2019 में सार्वजनिक हुई थी। वैज्ञानिकों ने तभी से इस बाह्य ग्रह पर अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है। इस बात के निशान अब बढ़ रहे हैं कि यह एक ऐसा विशाल जल जगत भी है जिसके विशाल महासागर में सूक्ष्म जीवों के रूप में जीवन की उत्पत्ति हुई हो सकती है।
 
अब तक की मान्यता: वैज्ञानिक अब तक अधिकतर उन्हीं बाह्य ग्रहों पर जीवन की संभावना का पता लगा रहे थे, जो यथासंभव हमारी पृथ्वी जैसे हों। K2-18 b इस सोच में बहुत फिट नहीं बैठता। वह K2-18 कहलाने वाले लाल रंग के एक ऐसे बौने सूर्य (तारे) की हर 33 दिनों में एक परिक्रमा पूरी करता है, जो हमारी पृथ्वी से 124 प्रकाशवर्ष दूर है।
 
K2-18 b तारे का द्रव्यमान (मास) हमारे सूर्यदेव के आधे के बराबर है और उसकी चमक भी उसी अनुपात में काफ़ी कम है इसीलिए उसे एक बौना तारा कहा जाता है। K2-18 b कहलाने वाले बाह्य ग्रह का द्रव्यमान हमारी पृथ्वी से क़रीब 8 गुना अधिक है यानी वह हमारी पृथ्वी से क़रीब 8 गुना अधिक भारी और क़रीब इतना ही अधिक बड़ा भी होना चाहिए। पृथ्वी पर की हर चीज़ वहां पहुंचने पर 8 गुनी अधिक भारी हो जाएगी। जो कुछ पृथ्वी पर 10 किलो भारी है, वह K2-18 b पर 80 किलो भारी हो जाएगा। इस कारण वहां यदि पेड़-पौधे और जीव-जंतु हुए तो वे पृथ्वी पर के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की तुलना में छोटे कद के होंगे।
 
(इस लेख में व्यक्त विचार/ विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/ विश्लेषण 'वेबदुनिया' के नहीं हैं और 'वेबदुनिया' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेती है।)

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