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यूएनओ में भी पाकिस्तान पर हर तरह से भारी पड़ा भारत

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United Nations General Assembly
संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में पाकिस्तान ने एक बार फिर स्वयं अपने ही गोल में गोल दागे और विश्व को पुनः स्पष्ट कर दिया कि उसके पास न तो विश्व को देने के लिए कुछ है और न ही विश्व से उसे सीखने की कोई अभिलाषा। उसे कश्मीर के आगे क्या है, नहीं मालूम और पीछे क्या है, उससे भी अपरिचित है। 
समस्या यह है कि यदि इस वैश्विक मंच से पाकिस्तानी नेताओं ने कश्मीर के लिए प्रलाप नहीं किया तो उन्हें अपने देश की सेना और अतिवादी संगठनों का कोप झेलना असंभव है। पाकिस्तानी राजनेताओं में एक भय ऐसा बैठ गया कि कश्मीर के नाम पर नहीं रोए तो सत्ता से उखाड़ दिए जाएंगे।
 
नवाज शरीफ का भाषण होते ही भारत के विदेश मंत्रालय ने आक्रामक रुख अख्तियार किया और ट्विटर के माध्यम से हाथोहाथ भाषण की धज्जियां उड़ा दीं। पाकिस्तान को लगे हाथों आतंक और आतंकियों से मुक्त होने की सलाह दे डाली और पाकिस्तान को पाक अधिकृत कश्मीर का अवैधानिक कब्जेदार घोषित कर दिया। 
 
दूसरे दिन सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में पाकिस्तान को उसकी अपनी सही जगह दिखा दी। भारत आज क्रीज के बाहर आकर खेल रहा है। वह समय नहीं रहा, जब धैर्य हमारा आभूषण होता था। भारत के इस नए रुख को देखकर पाकिस्तान में भी हैरानी है। 
 
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की ओर से दो भाषण हुए। सतत विकास शिखर सम्मलेन को मोदीजी ने एवं महासभा को सुषमा स्वराज ने संबोधित किया, वहीं पाकिस्तान की ओर से ये दोनों भाषण नवाज शरीफ ने पढ़े। 
 
भारतीय मीडिया ने अपने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के भाषणों की जमकर तारीफ की किंतु पाकिस्तानी मीडिया खुद अपने ही नेता को कोस रहा है। उसने भाषण के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री के आत्मविश्वास को सराहते हुए मोदीजी के व्यक्तित्व के सामने नवाज शरीफ की हस्ती को स्पष्ट शब्दों में नौसिखिया घोषित कर दिया।
 
यह पाठकों के लिए मनोरंजक होगा कि एक पाकिस्तानी चैनल ने तो यहां तक कह दिया कि नवाज शरीफ तो मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री बनने लायक भी नहीं। वहां नवाज शरीफ की तुलना मोदीजी के हर छोटे-बड़े काम से की जा रही है। यहां तक कि मोदीजी कौन से होटल में रुके, उनके कमरे का किराया कितना था, उनके दल में कितने सदस्य थे, किससे मिले, क्या उपलब्धियां हासिल कीं इत्यादि। 
 
पाकिस्तानी मीडिया को दुनिया के किसी और नेता से कोई सरोकार नहीं। उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए नवाज शरीफ 74 लोगों का दल लेकर गए थे जिनमें 27 लोग प्रधानमंत्री आवास के कर्मचारी हैं। 
 
नवाज शरीफ न्यूयॉर्क की सबसे आलीशान होटल में रुके थे जिसका किराया 8,000 डॉलर प्रतिदिन था। यही वह होटल है जिसमें पहले ओबामा रुकते थे, बाद में किसी चीनी का स्वामित्व होने की वजह से इस वर्ष वे वहां नहीं रुके। दूसरी ओर मोदीजी छोटा दल लेकर चलते है तथा जिस होटल में रुके थे उसका किराया मात्र 1,100 डॉलर प्रतिदिन था। 
 
पाकिस्तानी मीडिया का नवाज शरीफ पर दूसरा आरोप है कि इस प्रधानमंत्री के पास एक सक्षम विदेश मंत्री भी नहीं है और यही शर्म की वजह है कि विदेश मंत्री की हैसियत से प्रधानमंत्री के भाषण को भारतीय विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ के आंगन में ही ध्वस्त कर दिया। मोदीजी तो एक दिन पूर्व ही स्वदेश वापस लौट गए थे। 
 
उधर अमेरिका में अपनी स्पष्ट और बेबाक राय रखने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान पर दनादन पेनल्टी स्ट्रोक ठोक दिए। पाकिस्तान के बारे में वह सब सच्चाई कह दी, जो अभी तक अमेरिका का कोई राजनेता कहने की हिम्मत नहीं कर पाया था। 
 
विदेश नीति पर हुए एक रेडियो शो के दौरान जब पाकिस्तान के विषय में प्रश्न पूछे गए तो डोनाल्ड ट्रम्प ने सीधा जवाब दिया, पाकिस्तान विश्व की सबसे गंभीर समस्या है जिसके पास परमाणु हथियार भी हैं। यदि पाकिस्तान को रोकना है तो भारत का सहयोग लेना पड़ेगा, क्योंकि भारत के पास न केवल परमाणु हथियार हैं बल्कि शक्तिशाली सेना भी है। 
 
इतना ही नहीं, उन्होंने तो एक सांस में पाकिस्तान को शैतानी और क्रूर दिमाग वाले तानाशाह के देश उत्तरी कोरिया के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया। प्रश्नकर्ता ने जानना चाहा कि क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियार नष्ट करने के लिए आप राष्ट्रपति के रूप में अमेरिकी सेना भेजेंगे? तो ट्रम्प का जवाब था कि मैं अपने संभावित प्रतिद्वंद्वी को अपनी योजना के बारे में नहीं बताना चाहूंगा।
 
पाकिस्तानी मीडिया को लगने लगा है कि अब संयुक्त राष्ट्र संघ में रोने-धोने से कुछ नहीं होगा। पाकिस्तान को पहले सक्षम होना होगा अपने घरेलू मोर्चों पर, जहां सत्ता के कई केंद्र सक्रिय हैं। दूसरे, विश्व को भी विश्वास दिलाना पड़ेगा कि पाकिस्तान एक वास्तविक और गंभीर प्रजातंत्र है, जहां नीतियां चुनी हुई सरकार बनाती है न कि फौज या आईएसआई। 
 
जी जनाब, आपके ख्याल तो एकदम दुरुस्त हैं। होना भी चाहिए किंतु यदि ऐसा करना चाहते हो तो पहले अपनी सेना को समझाइए, जो अगले 25 वर्षों में भी संभव नहीं लगता और यदि वह संभव हो भी जाए तो उसके अगले 25 वर्षों में विश्व को समझाना पड़ेगा कि पाकिस्तान ऐसा कर चुका है।
 
लेकिन चलिए समझने की शुरुआत तो हुई। यदि प्रलाप करने से चांद हासिल हो जाता तो आज नासा की आवश्यकता नहीं होती। जितनी जल्दी यह गुमराह देश अपने सामर्थ्य को समझ ले, उतना ही उसके हित में होगा। क्या ही अच्छा होता यदि वह भारत को अपना रोल मॉडल मान लेता तो उसे ये दिन नहीं देखने पड़ते।
 
यह भी उल्लेखनीय है कि भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान का मीडिया मोदीजी के हर कदम की बेझिझक तारीफ कर रहा है। यदि हमारे देश में भी उसके कार्यों और साहसी प्रयासों को राजनीति से ऊपर उठकर सबका निष्कपट समर्थन मिले तो कितना अच्छा हो।

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