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महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का शहीद दिवस, जानें उनके बारे में

आज महान भारतीय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का शहीद दिवस है, जानें उनकी जीवन गाथा

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WD Feature Desk

, गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025 (10:10 IST)
chandrashekhar azad : हर साल चंद्रशेखर आजाद शहीद दिवस 27 फरवरी को मनाया जाता है। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर देशभक्त थे। चंद्रशेखर आजाद एक क्रांतिकारी थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आइए जानते हैं आज आजाद की पुण्‍यतिथि पर उनके बारे में...
 
चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय : चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था। आज उनका जन्मस्थान  अब 'आजादनगर' के रूप में जाना जाता है। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी और माता का नाम जगदानी देवी था। चंद्रशेखर आजाद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भाबरा में पूरी की। इसके बाद वे संस्कृत का अध्ययन करने के लिए वाराणसी गए। उन्होंने वहां कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया। चंद्रशेखर के पिता स्वाभिमानी, साहसी, ईमानदार और वचन के पक्के थे। यही गुण उन्हें विरासत में अपने पिता से मिले थे। 
 
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान : आजाद सन् 1920-21 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। जब गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए, तब उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया। जब उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, 'वंदे मातरम्‌' और 'महात्मा गांधी की जय' का स्वर बुलंद किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए। 
 
जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ, तब आजाद उस तरफ खिंचे और 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी' से जुड़े। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रहे आजाद हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में 1925 में काकोरी षड्यंत्र में सक्रिय भाग लिया तथा पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए। 
 
लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला : 17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और जब जे.पी. साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले तब उन पर गोली दाग दी, जो साण्डर्स के माथे पर ली और वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर पड़ा। फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दाग कर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब साण्डर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। इतना करने के बाद भी उन्होंने लाहौर में जगह-जगह पर परचे चिपकाए, जिन पर लिखा था- लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है। उनके इस कदम को भारतीय क्रांतिकारियों खूब सराहा गया। 
 
चंद्रशेखर आजाद का निधन : उन्होंने अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में सन् 1931 में रूस की बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आह्वान किया और यह संकल्प किया कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी और इसी संकल्प को पूर्ण करने के लिए 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने खुद को गोली मारी और देश के लिए शहीद हो गए और अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी। 
 
चंद्रशेखर आजाद के विचार : चंद्रशेखर आजाद एक कट्टर देशभक्त थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। उन्होंने 'आजाद' रहने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया और कभी भी अंग्रेजों के हाथों नहीं आए।
 
चंद्रशेखर आजाद के प्रमुख कार्य : चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

- उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की।
- उन्होंने काकोरी कांड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए सांडर्स की हत्या की।
 
चंद्रशेखर आजाद एक महान व्यक्ति थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए जो योगदान दिया, उसे हमेशा याद किया जाएगा। ऐसे क्रांतिकारी, लोकप्रिय चंद्रशेखर आजाद के अमूल्य योगदान को देशवासी कभी भी भूला नहीं सकते। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
 

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