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योग : परंपरा का अद्‍भुत उपहार

सूर्य नमस्कार का महत्व

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भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हयोग। यह एक प्राचीन विद्या है, जिसका उद्देश्य तन, मन और आत्मा की शक्तियों का यथोचित समन्वय कर उत्तम चरित्रवान व्यक्तियों द्वारा आदर्श समाज की रचना करना है। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण स्थापित कर स्वस्थ शरीर के साथ अपने उत्तरदायित्व का कुशलता से निर्वहन कर पाता है।

सूर्य नमस्कार भारतीय योग परम्परा का अद्भुत उपहार है। यह विभिन्न आसनों और व्यायाम का समन्वय है। इससे शरीर के सभी अंगों-उपांगों का पूरा व्यायाम हो जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर का शुद्धिकरण और सूर्य की ऊर्जा का संचार होता है।

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सूर्य नमस्कार का महत्व : सूर्य नमस्कार तन, मन और वाणी से की गई सूर्योपासना है। यह विभिन्न आसन, मुद्रा और प्राणायाम का समन्वय है। इसमें सूर्य किरणों से शरीर में बनने वाले विटामिन डी की प्राप्ति होती है जो अन्य किसी तरह से प्राप्त नहीं होता है।

सामान्य रूप से योग और विशेष रूप से सूर्य नमस्कार, कम आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को स्वस्थ तन-मन देकर, भविष्य का सजग नागरिक बनने में बड़ी भूमिका निभाता है। कोई भी स्वयं सूर्य नमस्कार कर निश्चित ही जीवन की एक स्वस्थ राह पा सकते हैं। सूर्य नमस्कार शरीर के सभी जोड़ों व मांसपेशियों को लचीला और सुदृढ़ बनाने तथा आंतरिक अंगों की मालिश करने का प्रभावशाली ढंग है। हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखता है सूर्य नमस्कार।

क्या है सूर्य नमस्कार : सूर्य नमस्कार तन से, मन से एवं वाणी से सूर्य का स्वागत है। उसके दो आधुनिक पहलू हैं। पहला सांघिक सूर्य नमस्कार और दूसरा संगीत के साथ सूर्य नमस्कार। संगीत के साथ सूर्य नमस्कार लगाने से वे अधिक आकर्षक, रोचक एवं संस्कारक्षम भी बनते हैं। वे सांघिक होने पर और भी फलप्रद हैं।

सरल उपासना और सौम्य संतुलित व्यायाम सूर्य नमस्कारों की विशेषता है। 'सूर्य नमस्कार' नाम का यह व्यायाम सात आसनों का समुदाय भी हैं।

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