Publish Date: Tue, 29 Oct 2019 (07:02 IST)
Updated Date: Mon, 18 May 2020 (12:15 IST)
कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। यह दीपोत्सव के पांच दिन पर्व का समापन दिवस होता है। यह पर्व 3 कारणों से मनाया जाता है।
1.कहा जाता है कि नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने इसी दिन उनके घर पहुंचे थे। सुभद्रा ने उनका स्वागत करके अपने हाथों से उन्हें भोजन कराकर तिलक लगाया था।
2.भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई भगवान यमराज को अपने घर आमंत्रित करके उन्हें तिलक लगाकर अपने हाथ से स्वादिष्ट भोजन कराया था। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए थे और उन्होंने यमुना को मृत्यु के भय से मुक्त होकर अखंड सौभाग्यवती बने रहने का वरदान दिया था। कहते हैं कि इस दिन जो भाई-बहन इस रस्म को निभाकर यमुनाजी में स्नान करते हैं, उनको यमराजजी यमलोक की यातना नहीं देते हैं। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना का पूजन किया जाता है।
3.इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। उनकी पूजा के साथ-साथ लेखनी, दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा की जाती है। वणिक वर्ग के लिए यह नवीन वर्ष का प्रारंभिक दिन कहलाता है। इस दिन नवीन बहियों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है। कहते हैं कि इसी दिन से चित्रगुप्त लिखते हैं लोगों के जीवन का बहीखाता।