Shardiya Navratri 2024: इस अनोखे मंदिर में दी जाती है रक्तहीन बलि, जानिए कहां है ये मंदिर
सदियों से चली आ रही इस विचित्र परंपरा के पीछे क्या है कारण
Publish Date: Mon, 23 Sep 2024 (13:26 IST)
Updated Date: Mon, 23 Sep 2024 (13:33 IST)
Mundeshwari Temple Bihar: भारत देवी-देवताओं और मंदिरों की भूमि है। इस देश में कई मंदिर अपनी अनोखी परंपरा, चमत्कार, शक्ति के कारण प्रसिद्ध हैं। हमारे देश में कई आश्चर्यजनक मंदिर हैं और सदियों से यह कई विचित्र परम्पराओं का चलन है। ऐसा ही एक मंदिर बिहार में है जो अपने चमत्कारों के कारण प्रसिद्ध है। इस मंदिर में विदेशों से भी भक्त आते हैं।
ALSO READ: Shardiya Navratri 2024: मां वैष्णो देवी के ये चमत्कारी रहस्य जानकर हैरान रह जाएंगे आप
अनोखा है बिहार के भभुआ में मुंडेश्वरी मंदिर
बिहार के भभुआ जिले में प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण किसने किया इस बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं, लेकिन यहां पर लगे शिलालेख के अनुसार उदय सेन नामक क्षत्रप के शासन काल में इसका निर्माण हुआ। इसमें कोई सन्देह नहीं कि यह मंदिर भारत के सर्वाधिक प्राचीन व सुंदर मंदिरों में एक है।
क्या है मुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास
मंदिर में 1900 सालों से लगातार पूजा होती चली आ रही है। पौराणिक और धार्मिक प्रधानता वाले इस मंदिर के मूल देवता हजारों वर्ष पूर्व नारायण अर्थात विष्णु थे। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार भगवती ने इस क्षेत्र को अत्याचारी असुर मुण्ड के आतंक से मुक्त करने के लिए उसका वध किया था। इसी से देवी का नाम मुंडेश्वरी पड़ा।
मंदिर के शिलालेखों में दर्ज है ऐतिहासिक महत्त्व
इस मंदिर के बारे में यहां पर स्थित शिलालेखों में इसका ऐतिहासिकता बताई गई है। शिलालेखों के अनुसार 1938 से लेकर 1904 के बीच ब्रिटिश विद्वानों आरएन मार्टिन फ्रांसिस बुकानन व ब्लाक ने मंदिर का भ्रमण किया। ब्लाक ने 1903 में मंदिर परिसर के शिलालेख का एक खंड प्राप्त किया।
इसका दूसरा खंड 1892 में खोजा गया। 1790 ई में दो चित्रकारों थामस एवं विलियम डेनियल ने इस मंदिर का चित्र बनाया। चित्र पटना संग्रहालय में सुरक्षित है। 1878 में विलियम हंटर ने बंगाल सर्वे में इसकी जानकारी दी।
मंदिर पर बलि की है अनोखी परंपरा
मंदिर पर बलि देने की एक अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां पर बलि के रुप में बकरे को मारा नहीं जाता है बल्कि उसकी पूजा कर छोड़ दिया जाता है। बलि के लिए लाए गए बकरे पर जब मां की मूर्ति के सामने पुजारी मंत्रपूत अक्षत-पुष्प छिड़कते हैं तो बकरा बेहोश सा होकर शांत पड़ जाता है।
पुजारी द्वारा फिर से अक्षत पुष्प छिड़कते ही बकरा पुनः जागृत होकर डगमगाते कदमों से खुद मुख्य द्वार से बाहर चला जाता है। इस प्रकार रक्तहीन बलि संपूर्ण होती है। मान्यता है यहां पर माता साक्षात विराजती हैं और वे अपनी संतान का वध नहीं चाहती बल्कि उसे चिरजीवन का वरदान देती हैं
गर्भगृह के मध्य में स्थित रंग बदलता शिवलिंग
मुण्डेश्वरी मंदिर के गर्भगृह के मध्य में एक काले रंग के पत्थर से निर्मित पंचमुखी शिव लिंग भी अत्यंत प्रभावकारी एवं अद्वितीय है। यहां पर मौजूद लोगों के अनुसार यह सुबह, दोपहर एवं शाम को सूर्य की स्थिति परिवर्तन के साथ विभिन्न आभाओं में दिखाई देता है।
श्री यन्त्र के स्वरुप में है निर्मित है यह मंदिर
मां मुण्डेश्वरी का मंदिर पूर्णरुप से श्री यन्त्र पर ही निर्मित है। इसके अष्टकोणीय आधार एवं चतुर्दिक अवस्थित भग्नावशेषों के पुरातात्विक अध्ययन के पश्चात यह तथ्य प्रमाणित हो चुका है। धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से श्री यन्त्र आधारित मंदिर में अष्ट सिद्धियां तथा संपूर्ण देवी देवता विराजमान होते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
WD Feature Desk
Publish Date: Mon, 23 Sep 2024 (13:26 IST)
Updated Date: Mon, 23 Sep 2024 (13:33 IST)