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आज के शुभ मुहूर्त

(पापांकुशा एकादशी व्रत)
  • शुभ समय- 6:00 से 7:30, 12:20 से 3:30, 5:00 से 6:30 तक
  • राहुकाल-दोप. 1:30 से 3:00 बजे तक
  • व्रत/मुहूर्त-पापांकुशा एकादशी व्रत (सर्वे.)/पंचक प्रारंभ
  • एकादशी तिथि- 5 अक्टूबर, दोपहर 12:00 बजे से प्रारंभ शुरू तथा 6 अक्टूबर को सुबह 9:40 पर समापन।
  • पारण का समय- 7 अक्टूबर 2022, सुबह 6:17 से 7:26 तक।
  • बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
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आदिशक्ति मां जगदम्बे नहीं हैं माता पार्वती?

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अनिरुद्ध जोशी

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020 (17:05 IST)
यह तो आप जानते ही होंगे कि सरस्वती और लक्ष्मी इन दुर्गा माता से भिन्न हैं, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि पार्वती भी क्या दुर्गा या अम्बे ही है? क्या काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला ये सभी एक ही माता हैं? क्या शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता सभी एक ही है? हिन्दू धर्म में सैंकड़ों देवियां हैं। उनमें से कुछ प्रजापतियों की पुत्रियां हैं, तो कुछ स्वयंभू हैं और कुछ अन्य किसी देवता की पत्नियां हैं।
 
 
शिवपुराण के अनुसार उस अविनाशी परब्रह्म (काल) ने कुछ काल के बाद द्वितीय की इच्छा प्रकट की। उसके भीतर एक से अनेक होने का संकल्प उदित हुआ। तब उस निराकार परमात्मा ने अपनी लीला शक्ति से आकार की कल्पना की, जो मूर्तिरहित परम ब्रह्म है। परम ब्रह्म अर्थात एकाक्षर ब्रह्म। परम अक्षर ब्रह्म। वह परम ब्रह्म भगवान सदाशिव है। एकांकी रहकर स्वेच्छा से सभी ओर विहार करने वाले उस सदाशिव ने अपने विग्रह (शरीर) से शक्ति की सृष्टि की, जो उनके अपने श्रीअंग से कभी अलग होने वाली नहीं थी। सदाशिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धि तत्व की जननी तथा विकाररहित बताया गया है।
 
वह शक्ति अम्बिका (पार्वती या सती नहीं) कही गई है। उसको प्रकृति, सर्वेश्वरी, त्रिदेव जननी (ब्रह्मा, विष्णु और महेश की माता), नित्या और मूल कारण भी कहते हैं। सदाशिव द्वारा प्रकट की गई उस शक्ति की 8 भुजाएं हैं।
 
पराशक्ति जगतजननी वह देवी नाना प्रकार की गतियों से संपन्न है और अनेक प्रकार के अस्त्र शक्ति धारण करती है। एकांकिनी होने पर भी वह माया शक्ति संयोगवशात अनेक हो जाती है। उस कालरूप सदाशिव की अर्द्धांगिनी को ही अम्बा जगदम्बा कहते हैं।

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