-
मोहम्मद इब्राहीम कुरैशी
इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक स्तंभ हज भी है। हैसियत वाले मुसलमान जिंदगी में एक बार हज करने जरूर जाते हैं। हज में विश्व से लाखों की संख्या में इस्लाम धर्म के अनुयायी एकत्रित होते हैं। हज विश्व के मुसलमानों का सबसे बड़ा इज्तिमा है। यहाँ से हाजी लोग प्यार-मोहब्बत, अमन-शांति का पैगाम लेकर अपने-अपने देश लौटते हैं। हज के बाद एक मुसलमान तमाम गुनाहों से पाक हो जाता है।'
हज' का अर्थ जियारत का इरादा करना है। कुछ तयशुदा दिनों में अल्लाह के घर काबा शरीफ की जियारत करने और अरफात के मैदान में कुछ इबादतें करने को हज कहते हैं। हज इस्लाम की एक महत्वपूर्ण इबादत है। मालदार, आकिल, बालिग, तंदुरुस्त मुसलमानों पर उम्रभर में सिर्फ एक बार फर्ज है। रास्ता सुरक्षित हो और बीवी-बच्चों के लिए खर्च मौजूद होना भी जरूरी है। औरत के लिए जरूरी है कि उसके साथ सफर में कोई 'महरम' (जिससे पर्दा न हो यानी बाप, भाई, बेटा या शौहर) जरूर रहे। अब से लगभग साढ़े चार हजार वर्ष पहले इराक के एक शहर में नमरूद बादशाह राज करता था। वे लोग चाँद-सितारों की पूजा करते थे। उनके नाम पर मंदिर थे। राजा और पंडित मिलकर समाज का शोषण करते थे। पंडित आजर के यहाँ इब्राहीम नाम का बेटा पैदा हुआ। वह जब जवान हुआ तो उसने चिंतन शुरू किया और यह समझ आई कि जो सूर्य देवता, चन्द्रमा और सितारे स्वयं एक कानून के अधीन गर्दिश करते हैं, वे हमारे खुदा कैसे हो सकते हैं? जब आपने अपने इन विचारों का प्रचार किया तो राजा ने आमंत्रित किया । राजा ने पूछा- 'इब्राहीम तुम्हारा रब कौन है?' आपने कहा- 'मेरा रब इंसानों को पैदा करता और मौत देता है।' राजा ने कहा- 'यह तो मैं भी कर सकता हूँ।' जेल से दो कैदी बुलाए । एक को फाँसी देना थी, उसे रिहा कर दिया। जिसे रिहा होना था, उसे फाँसी दे दी। आप अपनी पत्नी और भतीजे हजरत लूत (उन पर ईश्वर की कृपा वर्षा हो) के साथ वतन से निकल पड़े। नगर-नगर, डगर-डगर अल्लाह का पैगाम लोगों तक पहुँचाते रहे। फिलिस्तीन में हजरत लूत को इस मिशन के लिए छोड़कर आप अरब के मक्का शहर में तशरीफ लाए। उस समय मक्काएक बंजर, पथरीली जमीन थी। घास-फूस भी न थी और न कोई इंसानी आबादी थी। यहाँ अल्लाह का हुक्म हुआ कि अपने दूध पीते बेटे (हजरत इस्माइल) और पत्नी (बीबी हाजरा) को छोड़कर चले जाओ। |
| राजा ने पूछा- 'इब्राहीम तुम्हारा रब कौन है?' आपने कहा- 'मेरा रब इंसानों को पैदा करता और मौत देता है।' राजा ने कहा- 'यह तो मैं भी कर सकता हूँ।' जेल से दो कैदी बुलाए । एक को फाँसी देना थी, उसे रिहा कर दिया। जिसे रिहा होना था, उसे फाँसी दे दी। |
|
|
आप जब पत्नी को छोड़कर जाने लगे तो उन्होंने कहा- 'क्या यह अल्लाह का हुक्म है?' आपने कहा- 'हाँ'। इस पर पत्नी ने कुछ न कहा और रब के भरोसे खामोश हो गईं। कोई छत नहीं, तपती जमीन। जब पानी खत्म हो गया तो छोटे बच्चे को जमीन पर लिटाकर आसपास की पहाड़ियों पर चढ़कर पानी का स्रोत तलाश करने लगीं। जब थककर वापस आईंतो देखा कि बच्चा जहाँ एड़ी रगड़ रहा था, वहीं से पानी निकल आया। आपने उसके चारों ओर घेरा बनाकर कहा- 'जम-जम' अर्थात 'थम-थम'। वह पानी का कुआँ आज भी है और सारी दुनिया के हाजी वहाँ से पवित्र 'जम-जम' लाते हैं।
जब आपके बेटे इस्माइल जरा बड़े हुए तो अल्लाह ने हजरत इब्राहीम को आदेश दिया कि अपने बीवी-बच्चे को जाकर देखो। आप उनको देखकर खुश हुए। रब का शुक्र अदा किया। इसके बाद आपकी एक और परीक्षा ली गई और बेटे को अल्लाह की राह में कुरबान करने काईश्वरीय आदेश मिला। आपने उसे भी स्वीकार कर लिया किंतु ईश्वर ने बेटे की जगह मेंढ़े की कुर्बानी कुबूल की। इस प्रकार अल्लाह की मुहब्बत में जान-माल, वतन, बेटे की कुर्बानी की परीक्षा में सफल होने पर आपसे कहा गया कि इस जगह एक घर बनाओ ताकि सारी दुनियाके इंसान इस जगह आकर प्रेरणा ले।
आज दुनियाभर के लोग सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित इस घर यानी काबा शरीफ में हज करने आते हैं। हज का पैगाम यही है- 'एक अल्लाह के सब बंदे, एक आदम की सब औलाद, एक मंजिल के सब राही।'
जब हाजी हज की तैयारी करता है तो चार माह पहले से वह सबसे मिलकर क्षमा-याचना करता, लेन-देन साफ करता, लोगों के जो हक उस पर है, अदा करता और अपने-आपको अल्लाह की पसंद वाला बंदा बनाने का प्रयत्न करता है। सारे समाज में नेकी, भलाई और सौहार्द का वातावरण बन जाता है।
हाजी लोग हज करने जाते हैं। वहाँ इस्लामी कानून लागू होने के कारण चोरी और दूसरे अपराध बहुत ही कम मात्रा में होते हैं। अजान की आवाज सुनकर सोने-चाँदी की दुकानें खुली छोड़कर लोग चले जाते हैं, मगर उन्हें चोरी का डर नहीं होता। औरतें निडर होकर घूमती हैं। कोई छेड़छाड़ का डर नहीं। किसी की कोई वस्तु गिर जाए, कोई उठाने वाला नहीं। इतनी लाखों की भीड़ शांतिपूर्ण रूप से अपनी नमाज जिक्र में लगी रहती है। यहाँ पुलिस कंट्रोल की भी जरूरत नहीं पड़ती है।