के बाद ईद का पर्व मनाते हैं तो एक-दूसरे से खुशी का इजहार इन सेवइयों के साथ करते हैं। कई दशक पहले मुस्लिम समुदाय के लोग मोहल्ले में एक जगह इकट्ठे होते थे और सेवइयाँ तैयार करते थे, लेकिन नई पीढ़ी में यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। पहले घर पर ही महिलाएँ आटे से सेवइयाँ तैयार करती थीं, लेकिन अब बाजार के बढ़ते प्रभाव और लोगों की व्यस्तता ने भी इस पर अंकुश लगाया है। फिर भी अभी कुछ परिवार ऐसे हैं जो उन्हीं परंपरागत तरीकों से सेवइयाँ तैयार करते हैं और उसे खाते-खिलाते हैं।सेवई के प्रकार :
फेनी जो सेवई का ही एक प्रकार माना जाता है, ईद के दिन इसे भी लोग घरों पर तैयार करते हैं और ईद की मिठास को और बढ़ाते हैं। ईद के मौके पर शीर खुरमा, खीर और जर्दा भी विशेषतौर से तैयार की जाती है। इस दौरान बाजार में दुकानें इन सामग्रियों से अटे पडे़ रहते हैं।
क्या कहना है पुरानी पीढ़ी का :
पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग अपने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि ईद के मौके पर वे अपने घरों तक ही सिमटकर नहीं रह जाते थे। महिलाओं में भले ही पहले पर्दा प्रथा का काफी कट्टरता से पालन किया जाता था, लेकिन ईद के मौके पर मोहल्ले की महिलाएँ इकट्ठा होती थीं और हँसते-हँसाते सेवइयाँ तैयार करती थीं। सारे लोग एक जगह इकट्ठा होते और इन सेवइयों का आनंद लेते थे। अब उन्हें इस बात का अफसोस होता है कि अब पहले वाली बात त्यौहारों में नहीं रह गई है। वो हँसी-ठिठोली के साथ सेवइयों का मजा लेने वाले दिन तो जैसे लद ही गए। लेकिन फिर भी सेवइयों की वह मिठास अब भी बरकरार है।