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दस्तरख्वान पर सजते हैं पकवान

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रमज़ानुल मुबारक
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पवित्र रमजान माह में रोजे और इबादत की रूहानी रंगत छाई हुई है। रोजेदार की दुआएँ अल्लाहताला कबूल करता है। इस माह में रोजे का सवाब अजीम होता है। सूर्य उदय से कुछ देर पहले शुरू हुआ रोजा सूर्यास्त तक जारी रहता है। शाम ढलते ही मुस्लिम बहुल इलाके गुलजार हो उठते हैं।

फल-पकवानों की दुकानें सजने लगती हैं। रोजा इफ्तार की खरीददारी के दौर के बाद दस्तरख्वान तमाम व्यंजनों से सजने लगते हैं। शहर के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सजी दुकानों पर खरीददारी करते लोगों को देखते ही बनता है।

रोजा के दिनों में इराक व ईरानी खजूर ज्यादा पसंद किए जाते हैं। बाजारों में इन दिनों विभिन्न वैरायटियों में खूजूर बिक रही है, चूँकि खजूर खाकर ही रोजा खोला जाता है इसलिए इनकी माँग जोरों पर है। रोजेदार इफ्तारी की खरीदी के बाद परिवार वाले एक साथ रोजा खोलते हैं।

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