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PM नरेंद्र मोदी ने बताया 2047 तक भारत कैसे बनेगा दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी?

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, मंगलवार, 16 अप्रैल 2024 (14:46 IST)
  • पीएम मोदी 2 साल से 2047 विजन पर कर रहे हैं काम
  • देशभर से लाखों लोगों से राय और सुझाव मांगे
  • अब तक 15 लाख से ज्यादा लोगों से सुझाव मिले
  • सरकार ने पता लगाया कि 25 साल में भारत को कहां और कैसे देखना चाहते हैं लोग
  • कैसे अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान से आगे निकलेगा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 2047 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी (India Economy) बनाने का विजन रखा है। इंडियन इकोनॉमी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले 5 साल में भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा।

पीएम मोदी ने अपना यह विजन भी बताया कि कैसे 2047 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेगा। बता दें कि यह बात पीएम मोदी ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में कही है।

भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। सरकार ने इसके लिए लाखों लोगों, विश्‍वविद्यालयों और एनजीओ से चर्चा कर सुझाव मंगाए हैं। सरकार ने करीब 15 लाख लोगों से यह जाना कि आने वाले 25 साल में वे भारत को कहां और कैसे देखना चाहते हैं।

100 दिनों के टारगेट का जादू
पीएम मोदी ने कहा— मैं एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहता। 2019 में मैं 100 दिनों का टारगेट लेकर चला था। कई काम हुए। तीन तलाक को खत्म किया गया। 370 खत्म किया। ये सब 100 दिनों के टारगेट के तहत हुआ। पीएम ने कहा कि विश्वास बहुत बड़ी शक्ति है। भारत जैसे देश में इस विश्वास को मैं अपनी जिम्मेदारी मानता हूं। मैं।एक बेटे की तरह भारत माता की सेवा कर रहा हूं। यही। मेरा मिशन है।
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ये विकास का सिर्फ एक ट्रेलर है : पीएम मोदी ने कहा "जब मैं कहता हूं कि मेरे पास बड़ी योजनाएं हैं, तो किसी को डरना नहीं चाहिए। मैं किसी को डराने या चकमा देने के लिए फैसले नहीं लेता। मैं देश के पूरे विकास के लिए फैसले लेता हूं, उन्‍होंने कहा, ‘सरकारें हमेशा कहती हैं कि हमने सब कुछ किया है। लेकिन मुझे विश्वास नहीं है कि मैंने सब कुछ किया है। मैंने सब कुछ सही दिशा में करने की कोशिश की है। फिर भी मुझे बहुत कुछ करने की जरूरत है। अभी बहुत काम बाकी है। क्योंकि मैं देख रहा हूं कि मेरे देश की कितनी जरूरतें हैं। हर परिवार की अपनी जरूरतें हैं। इसीलिए मैं कहता हूं कि विकास का ये एक ट्रेलर है... अभी पूरी फिल्म बाकी है'

अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान में कहां है भारत?
अभी कहां है भारत : बता दें कि वर्तमान में भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी इकोनॉमी है। भारत से आगे अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान हैं। भारत के 2026 में जापान और 2027 में जर्मनी से आगे निकलने का अनुमान है। जापान फिलहाल मंदी में फंसा है, जबकि जर्मनी की इकोनॉमी भी संघर्ष कर रही है। इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने इंडियन इकोनॉमी को लेकर सकारात्मक रुख जताते हुए कहा कि आने वाले 5 साल में देश की इकोनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। इस लिहाज से भारत 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगी।

मैंने वेकेशन नहीं, 100 दिन का प्‍लान बनाया : इस इंटरव्‍यू में मोदी ने 2047 का विज़न बताते हुए अपना प्‍लान बताया है। मोदी ने कहा इस विजन को पूरा करने के लिए की नींव तैयार कर दी गई है। मैं लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा हूं। मुझे अनुभव है। बार-बार चुनाव होने से मेरे राज्य से 30- 40 सीनियर अच्छे अधिकारी इलेक्शन ड्यूटी के लिए ऑब्जर्वर बनकर जाते थे। वो 40-50 दिन बाहर रहते थे। तब मुझे चिंता होती थी कि मैं सरकार कैसे चलाऊंगा? क्योंकि देश में ऐसे चुनाव होते रहते हैं और मेरे अधिकारी ऑब्जर्वर रहते हैं। तब मैंने सोचा कि मैं ऐसे समय को वेकेशन के रूप में खत्म नहीं करूंगा। इसलिए मैं 100 दिनों की भी योजना बनाकर चलता था।
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क्‍या है मोदी का प्‍लान?
  • 2047 विकसित भारत प्रोजेक्ट पर पिछले 2 साल से काम चल रहा है।
  • तीसरे टर्म में 100 दिनों के लिए एक टारगेट तय किया है मोदी सरकार ने।
  • पीएम मोदी 2 साल से 2047 विजन पर काम कर रहे हैं।
  • देशभर से लाखों लोगों से राय और सुझाव मांगे।
  • अब तक 15 लाख से ज्यादा लोगों से सुझाव मिल चुके हैं।
  • लोगों से ये जाना कि वे आने वाले 25 साल में भारत को कैसे देखना चाहते हैं।
कैसे AI होगा मददगार : पीएम मोदी ने कहा कि मैंने कई साल तक देश की कई यूनिवर्सिटी से संपर्क कर उनसे चर्चाएं कीं। कई NGO से संपर्क किया। 15 से 20 लाख लोगों ने अपने इनपुट दिए हैं। फिर मैंने AI की मदद ली। इस पर काम करने के लिए हर डिपार्टमेंट में अधिकारियों की एक डेडिकेटेड टीम बनाई है। अब यह देख  रहे हैं कि देश के विकास में कैसे एआई की मदद ली जा सकती है। इस पर काम शुरू भी हो गया है।
Edited by: Navin Rangiyal


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