Financial Planning %e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87 %e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82 %e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80 %e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4 111042500011_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कैसे लिखें अपनी वसीयत

Advertiesment
वसीयत उमेश राठी
18 वर्ष से अधिक आयु, मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्तियों, जिनके पास संपत्ति/जीवन बीमा पॉलिसी है, को अपनी वसीयत आवश्यक रूप से लिखना चाहिए। वसीयत लिखने से व्यक्ति के जीवनकाल में संपत्ति पर उसी का अधिकार रहता है एवं मृत्यु उपरांत ही उत्तराधिकारी संपत्ति प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति अपने जीवनकाल में वसीयत कितनी भी बार बदल सकता है एवं उसके द्वारा लिखी गई आखरी वसीयत ही मान्य होती है।

वसीयत लिखकर न सिर्फ कोई व्यक्ति अपनी इच्छानुसार संपत्ति का बँटवारा कर सकते हैं, बल्कि अपने वारिसों को पारिवारिक विवाद, कानूनी उलझनों एवं खर्चों से भी बचा सकते हैं। वसीयत से वारिसों की टैक्स प्लानिंग भी बखूबी की जा सकती है।१. संपत्ति एवं दायित्वों की सूची : सर्वप्रथम अपनी सभी संपत्तियों एवं दायित्वों की सूची बना लेना चाहिए, जिसमें सभी चल-अचल संपत्ति, जीवन बीमा पॉलिसी, दुर्घटना बीमा पॉलिसी एवं समस्त दायित्वों का समावेश हो।

2. उत्तराधिकारियों की सूची : ऐसे व्यक्तियों/रिश्तेदारों की सूची बना लेना चाहिए, जिनके हक में आप वसीयत लिखना चाहते हैं।

3. उत्तराधिकारियों को दी जाने वाली संपत्ति का निर्धारण : आप किस व्यक्ति को कौनसी संपत्ति एवं किस अनुपात में देना चाहते हैं, का भी निर्धारण कर लेना चाहिए।

4. उत्तराधिकारियों की टैक्स प्लानिंग : जिन व्यक्तियों के हक में आप वसीयत लिखना चाहते हैं, उन सभी की वर्तमान एवं भविष्य में वसीयत से प्राप्त संपत्ति से अर्जित आय पर टैक्स का अनुमान लगाना चाहिए एवं इस प्रकार वसीयत लिखी जाना चाहिए कि उत्तराधिकारियों को भविष्य में अर्जित आय पर कम से कम टैक्स अदा करना पड़े। इसके लिए आप एस्टेट प्लानिंग में महारथ हासिल सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की भी मदद ले सकते हैं।

5. साधारण पेपर पर भी लिखी जा सकती हैः वसीयत साधारण पेपर पर भी लिखी जा सकती है एवं इसे स्टाम्प पेपर या लीगल पेपर पर लिखना आवश्यक नहीं होता है।

6. हस्तलिखित या टाइप्ड कैसे भी लिखी जा सकती है : कानूनी रूप से वसीयत हस्तलिखित या टाइप्ड कैसे भी लिखी जा सकती है, परंतु वसीयत सहीं ढंग से पढ़ी जा सके, उसके लिए उसे टाइप करा लेना चाहिए।

7. स्पष्ट भाषा एवं शब्दों का प्रयोग : वसीयत लिखने के लिए किसी कानूनी भाषा का उपयोग नहीं करना होता है। वसीयत में स्पष्ट भाषा एवं शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिससे वसीयतकर्ता का उद्देश्य स्पष्ट हो एवं भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

8. संपूर्ण एवं स्पष्ट विवरण : कौनसी संपत्ति किस उत्तराधिकारी को दी जाना है एवं किस अनुपात में दी जाना है, का उल्लेख वसीयत में स्पष्ट रूप से संपत्ति एवं उत्तराधिकारी के पूर्ण विवरण के साथ लिखना चाहिए।

9. निष्पादक की नियुक्ति : संपत्ति के बँटवारे के लिए निष्पादक नियुक्त करना अनिवार्य नहीं है, परंतु यदि संपत्ति ज्यादा है एवं विवाद की स्थिति उत्पन्ना होने की संभावना है तो अपने किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को निष्पादक नियुक्त कर देना चाहिए।

10. प्रत्येक पेज पर हस्ताक्षर : वसीयतकर्ता को वसीयत के प्रत्येक पेज पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होता है।

11. गवाह : वसीयत में दो गवाह अनिवार्य रूप से होना चाहिए। गवाह ऐसे व्यक्तियों को बनाया जाना चाहिए, जो परिचित हों, वयस्क हों एवं जिनका वसीयत में कोई हित न हो।

12. रजिस्ट्रेशन : वसीयत को रजिस्ट्रेशन अथवा नोटरी करना आवश्यक नहीं है, परंतु भविष्य में विवाद एवं उलझनों से बचाव के लिए रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए। रजिस्ट्रेशन कराने का एक फायदा यह भी है कि वसीयत गुम होने पर उसकी कॉपी प्राप्त की जा सकती है। वसीयत का रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (जहाँ प्रापर्टी की रजिस्ट्री होती है) में होता है। वैसे तो वसीयत आप स्वयं, वकील या सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की मदद से बना सकते हैं, लेकिन यदि वसीयत को चुनौती देने की संभावना है या वारिसों की टैक्स प्लानिंग करना चाहते हैं तो एस्टेट प्लानिंग में महारथ हासिल सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से सलाह जरूर लेना चाहिए।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi