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FlashBack2020 : वर्ष 2020 की धर्म संबंधी 20 बड़ी बातें

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अनिरुद्ध जोशी

फरवरी माह में कोरोना वायरस चीन के वुहान में रौद्र रूप दिखाने लगा था इसलिए सरकार ने वहां फंसे हुए अपने लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया और उन्हें भारत लाकर पहले क्वारंटीन सेंटर में रखा गया और वहां से घर भेजा गया। फरवरी के अंत में भारत ने फ्रांस और ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का खिताब अपने नाम किया। लेकिन लगता है इस खिताब को किसी की नजर लग गयी और जनता कर्फ्यू के बाद 22 मार्च 2020 को लॉकडाउन प्रारंभ हुआ।
 
 
1. शाहीन बाग और दंगे : नए वर्ष 2020 की शुरुआत जेएनयू में हिंसा के साथ ही नागरिकता कानून में संशोधन के खिलाफ दिसंबर 2019 से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई। शाहीनबाग में मुसलमानों का आंदोलन प्रारंभ हुआ जिसे विपक्षी दलों ने हवा दी। इसलिए धीरे-धीरे प्रदर्शनकारियों की संख्‍या बढ़ती गई और देशभर में धार्मिक उन्माद फैल गया। फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग के आंदोलनकारियों को समझाने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया लेकिन आंदोलनकारियों ने इनकी बात नहीं सुनी और सीएए कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे के दौरान कुछ कट्टरपंथियों दे दिल्ली में दंगे करवा दिए। यह सब भारत को बदनाम करने की कुछ लोगों की साजिश के चलते हुआ। दिल्ली दंगों में कई लोग मारे गये और संपत्ति को भी काफी नुकसान हुआ।
 
2. राममंदिर ट्रस्ट : फरवरी माह में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' नामक ट्रस्ट का गठन किया है।
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3. लॉकडाउन : फरवरी माह में कोरोना वायरस चीन के वुहान में रौद्र रूप दिखाने लगा था इसलिए सरकार ने वहां फंसे हुए अपने लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया और उन्हें भारत लाकर पहले क्वारंटीन सेंटर में रखा गया और वहां से घर भेजा गया। देश में कोराना के खौफ के बावजूद सीएए विरोधी प्रदर्शन करने पर अड़े रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस महामारी की गंभीरता से देश को अवगत कराया और इसी के साथ ही उन्होंने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। तब शाहीनबाग में कुछ जगहों से तंबू उखड़ने लगे। इसके दो दिन बाद ही उन्होंने देश में 21 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी जिसे बाद में आगे बढ़ाया गया।
 
4. तब्लिगी जमात ने फैलाया देशभर में कोरोना : जनता कर्फ्यू के दौरान और लॉकडाउन के बाद भी दिल्ली में तब्लिगी जमात का जलसा बगैर परमिशन के चलता रहा। हिदायत के बाद भी वहां चीन, मलेशिया और तमाम अन्य मुल्कों से आए हजारों लोगों का जमावाड़ा रहा। अप्रैल महीने की शुरुआत में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तब्लीगी जमात के सदस्यों का एक साथ एकत्रित होना और वह भी लॉकडाउन के दौरान, यह बड़ा मुद्दा बन गया। जब यह बात सामने आई कि अधिकांश जमाती कोरोना पॉजिटिव हैं तब तो सरकारों की मुश्किलें और बढ़ गयीं क्योंकि जब तक प्रशासन चेतता तब तक यह जमाती अलग-अलग शहरों के लिए रवाना हो चुके थे और यह जहां भी गए वहीं पर इन्होंने कोरोना को फैलाया। इनका मुखिया मौलाना साद अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।
 
5. ग्रंथों से निकाली गए महामारी फैलने की भविष्यवाणी : नास्त्रेदमस को लेकर कुछ लोग दावा कर रहे थे कि उन्होंने अपनी भविष्वाणी की पुस्तक के छंद 2:53 में कोराना वायरस का जिक्र किया है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अलावा लोग अपने अपने धर्मग्रंथों से महामारी के फैलने की भविष्वाणी के दावे करने लगे। श्रीराम शर्मा आचार्य की भविष्यवाणी का वीडियो भी खूब वायरल हुई जिसमें कहा गया कि एक ऐसी महामारी फैलेगी कि डॉक्टरों को समझ में नहीं आएगी कि इसकी क्या दवा दें। लाखों लोग मारे जाएंगे। विषम काल जो आ रहा है। इससे बड़ा विषमकाल कभी नहीं आया। इसी तरह वेद और पुराणों के भी कुछ श्लोक निकालकर यह दावा किया गया कि इस समय की भविष्यवाणी पहले ही की जा चुकी है। दावा किया गया कि 10 हजार वर्ष पूर्व लिखी नारद संहिता में पहले ही कोरोना महामारी के फैलने और इसके खात्मा की भविष्यवाणी की गई है। दावा करने वाले इसके लिए एक श्लोक का उदारहण देते हैं... 
 
भूपावहो महारोगो मध्यस्यार्धवृष्ट य:।
दु:खिनो जंत्व: सर्वे वत्सरे परिधाविनी।
अर्थात परिधावी नामक सम्वत्सर में राजाओं में परस्पर युद्ध होगा महामारी फैलेगी। बारिश असामान्य होगी और सभी प्राणी महामारी को लेकर दुखी होंगे। इसी तरह बृहत संहिता में भी इसी तरह के दावा किया गया। बृहत संहिता में वर्णन आया है कि 'शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जना' अर्थात जिस वर्ष के राजा शनि होते है उस वर्ष में महामारी फैलती है। विशिष्ट संहिता अनुसार पूर्वा भाद्र नक्षत्र में जब कोई महामारी फैलती है तो उसका इलाज मुश्किल हो जाता है। विशिष्ट संहिता के अनुसार इस महामारी का प्रभाव तीन से सात महीने तक रहता है। कई लोगों ने रामचरितमानस के कुछ श्लोक निकालकर यह दावा किया किया कि इस ग्रंथ में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि चमगादड़ से फैलेगी एक महामारी और लाखों लोग मरेंगे, परंतु उनका ये दावा झूठा निकला। इसी प्रकार से ओशो ने भी बुद्ध पर दिए एक प्रवचन एस धम्मो सनंतनो प्रवचन माला के दौरान महामारी के संबंध में जिक्र किया था।
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6. पूर्व में भी फैली थी महामारी : बाइबल, कुरआन और पुरा‍ण आदि ग्रंथों की कुछ बातों को प्रचारित कर यह दावा किया गया कि उस दौर में प्रॉफेट, संत, अवतारी पुरुषों ने लोगों को महामारी से बचाया था। जैसे कहा गया कि हजरत मुहम्मद स.व. के दौर में वबा फैली थी तो उन्होंने इससे बचने की हिदायत दी थी। इसी तरह भगवान बुद्ध के समय वैशाली राज्य में महामारी फैली तो उनके उस राज्य में आने मात्र से यह महामारी समाप्त हो गई थी। भगवान बुद्ध ने यहां रतन सुत्त का उपदेश दिया जिससे लोगों के रोग दूर हो गए। इसी तरह सबसे खास बात यह कि भिक्षु बोधिधर्मा ने जब चीन का दौरा किया था तब वहां पर महामारी फैली हुई थी। उन्होंने लोगों को इस महामारी से बचाया था। शिरडी के सांईबाबा के समय भी महामारी फैली थी तो बाबा ने शिरडी के लोगों को उस काल की महामारी से अपने तरीके से बचाया था। 
 
7. रामायण, महाभारत, कृष्णा जैसे पुराने सीरियल पुन: प्रारंभ : रामायण, महाभारत, कृषणा जैसे धार्मिक टीवी सीरियल पुन: प्रारंभ हुए। दूरदर्शन के सबसे लोकप्रिय टीवी शोज में हैं। ये वो शोज हैं जिन्होंने इतिहास रचा और इनमें काम करने वाले सभी सितारे अपने आप में लीजेंड बन गए। लोग इसे देखकर कहने लगे कि एक जमाना था जब इन टीवी शो के कारण भारत बंद अर्थात लॉकडॉउन जैसा ही हो जाता था और आज लॉकडॉउन में यह सीरियल देख रहे हैं। कोरोना काल में घर की चार दिवारी में कैद हो चुके लोगों ने पुन: यह सीरियल देखा और अपने बच्चों को भी दिखाया। एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा टीआरपी रामानंद सागर के शो रामायण ने हासिल की। इंटरनेट पर यह यह सीरियल सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले सीरियल बन गए। कलर्स, सोनी आदि सभी चैनलों पर पुराने सीरियल रिपिट किए जाने लगे। दूरदर्शन ने रामायण, महाभारत, श्रीकृष्णा आदि पुराने धारावाहिक शुरू किये तो वह काफी हिट हुए और ऐसे में जब शूटिंग बंद होने से विभिन्न धारावाहिकों के नये एपिसोड नहीं आये तो लोग वेब सीरिज आदि देखकर समय बिताने लगे। यही नहीं बड़े पर्दे की फिल्में भी तीसरे पर्दे पर रिलीज होने लगीं हैं। 
 
8. बहुत से त्योहार मनाने पड़े घरों में : 22 मार्च 2020 को कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन लग गया था। संक्रांति, वसंत पंचमी, होली और रंगमंचमी का त्योहार ही अच्छे से मना बाकी सारे त्योहार लॉकडाउन और अनलॉक की प्रक्रिया के बीच ही मनाए गए। अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान ही इस बार नवात्रि का पर्व मनाया गया। कई जगह पांडल लगाने की परमिशन लेना पड़ी परंतु प्रशासन ने किसी को भी गरबा करने की अनुमति नहीं दी।
 
9. सभी धर्मों के त्योहार रहे फीके-फीके : इस बार लगभग सभी धर्मों त्योहार में उत्साह देखने को नहीं मिला। देखते भी कैसे आधे त्योहार तो लॉकडाउन में ही चले गए बचे त्योहार अनलॉक की प्रक्रिये के बीच प्रशासन की परमिशन नहीं मिलने के कारण सार्वजनिक रूप से नहीं मना सके। हालांकि दशहरा और दीपावली की धूप जरूर थोड़ी बहुत रही। परंतु कई राज्यों में इस दौरान मंदिरों को खोलने पर प्रतिबंध ही रहा।
 
10. ऑनलाइन पूजा पाठ : किसी ने यह कभी नहीं सोचा था कि पंडितजी ऑनलाइन ग्रह प्रवेश ही नहीं बल्कि सभी तरह की पूजा पाठ करवाने लगेंगे। अखबारों में ऐसी कई खबरें पढ़ने को आई की पंडितजी ने ऑनलाइन पूजा कराई। कुछ जगहों पर तो ऑनलाइन विवाह भी हो गया। कई प्रसिद्ध मंदिरों में ऑनलाइन पूजा के लिए बुकिंग ली गई। लॉकडाउन में ऑनलाइन मंगनी और ऑनलाइन सगाई भी हो गई। करवां चौथा के त्योहार में भी पति ने पत्नी को वीडियो कॉलिंग करके आशीर्वाद दिया। मतलब यह कि वीडियो कॉलिंग कर किए पति के दर्शन।
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11. बंद हो गए मंदिर : कोरोना के खतरे को देखते हुए करतारपुर कॉरिडोर को बंद कर दिया गया है। माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने NRI,विदेशी श्रद्धालुओं और विदेश से लौटे भारतीयों को दर्शन के लिए न आने को कहा है। स्वामीनारायण मंदिर ने दुनिया भर में बड़े आयोजनों को स्थगित कर दिया। शिरडी साईं मंदिर भी भक्तों के लिए बंद हो गया। इसी तरह देश के तमाब बढ़े छोटे मंदिर और मस्जिद बंद कर दिए गए। अनलॉक प्रक्रिया के दौरान कुछ राज्यों में इन्हें खोला गया लेकिन सावधानियों और निगरानी के बीच हो रही है भक्तों की एंट्री।
 
12. मंदिरों में बदले नियम : कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते मंदिरों में भी बहुत कुछ बदलाव हुआ। घंटी बजाना हो गया बंद, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होने लगे दर्शन, चरणामृत और प्रसाद की व्यवस्था में भी बदलाव हुए। मंदिर के अंदर प्रसाद मिलना बंद हुआ। गर्भगृहों में लोगों के जाने पर रोक लगा दिया गया। अब दूर से ही देवी या देवता के दर्शन कर सकते हैं। कई मंदिरों में तो फूल और मालाओं पर भी प्रतिबंध रहा। लंगर के नियम भी बदल गए। केवल मास्क पहनने वालों को ही प्रवेश की अनुमति मिली और एक बार में 5 लोग ही मंदिर परिसर में जा सके। लॉकडाउन के चलते कई बड़े मंदिरों की व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। चार माह के लॉकडाउन के चलते मंदिर कर्मचारियों को घर पर ही बैठना पड़ा और इसे उनके आर्थिक जीवन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।
 
13. घर में ही पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य : कोरोना काल में अब लोग घरों में भी पूजा करने लगे हैं। नेट पर सर्च करके या किताबों से कई लोग पूजा विधि सीख गए और घर में ही पूजा पाठ करने लगे। कोरोना काल ने कई बड़े बदलाव किए जैसे कि शादी-विवाह आदि बड़े सादे ढंग से आयोजित किए जाने लगे और नाममात्र के ही रिश्तेदारों की उपस्थिति इन आयोजनों में रहने लगी। बहुतों ने तो घरों के सामने ही टेंट लगाकर 50 लोगों को बुलाकर ही विवाह संपन्न किए। हालांकि कई जगहों पर कोरोना गाइडलाइन के निमय तोड़े जाने की घटनाएं भी सामने आई।
 
14. विवादित फिल्में और विज्ञापन : लॉकडाउन के चलते एक ओर पुराने धारावाहिक प्रारंभ हुए वहीं टॉकिज या थियेटरों के बंद होने से अमेजन प्राइम वीडियो, नेटफ्लिक्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में लॉन्च होने लगी और वेब सीरिज देखने वाले लोगों की संख्‍या भी बढ़ने लगी। बड़े पर्दे की फिल्में भी तीसरे पर्दे पर रिलीज होने लगीं। वेब सीरिज ने तो मर्यादा की सभी दीवारें लांघ दी और गाली गलोच, अवैध संबंध को सामान्य बना दिया। एकता कपूर की पाताल लोक नामक वेब सीरिज विवादों में रही। कपूर इस मामले में वेब सीरीज के प्रसारण के जरिये अश्लीलता फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों के अपमान के आरोपों में घिरीं हैं। ए सूटेबदल बॉय, आश्रम, दुर्गावती आदि ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया तो वहीं अंतर धार्मिक विवाह पर आधारित तनिष्क के एक विज्ञापन ने हिन्दू भावनाओं को आहत किया। इस बीच भारतीय सेना की छवि खराब करने वाली वेब सीरिज और फिल्मों का बनना तो बहुत ही चिंतनीय रहा। एकता कपूर की वेब सीरीज ट्रिपल एक्स 2 ऐसी ही एक वेब सीरिज थी।
 
15. लव जिहाद एवं धर्मान्तरण पर कानून : लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं और अपराध के चलते सबसे पहले यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठाया था और इस पर कानून बनाने की बात कही थी, परंतु सबसे पहले मध्यप्रदेश की शिवराज सकार ने ही इस पर एक कानून बनाकर उसे कैबिनेट से पास करवा लिया। अब लव जिहाद पर 1 0 साल की सजा का प्रवधान रखा गया। इसकी के चलते गुजरात, हरियाणा और यूपी सरकार ने भी ऐसा ही कानून लाने की बात कही। यह मसला तब ज्यादा चर्चा में आया जब हरियाणा के फरीदाबाद में एक मुस्लिम युवक तौसीफ ने सरेआम हिन्दू युवती निकिता तोमर की हत्या कर दी थी। तौसीफ न सिर्फ निकिता तोमर के साथ जबरदस्ती शादी करना चाहता था, बल्कि उस पर अपना धर्म बदलने के लिए भी दबाव डाल रहा था। इस बात की तस्दीक खुद निकिता तोमर के साथ बी.कॉम ऑनर्स के थर्ड ईयर में पढ़ने वाले उसके दोस्तों ने की थी।
 
16. ग्रहण : वर्ष 2020 में 4 चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण थे। इस वर्ष चार उपच्छाया चंद्र ग्रहण रहे। पहला 10 जनवरी को, दूसरा 5 जून को, तीसरा 5 जुलाई को और चौथा 30 नवंबर को रहा। इसी तरह वर्ष 2020 में दो सूर्य ग्रहण रहे पहला 21 जून को वलयकार सूर्य ग्रहण रहा, दूसरा 15 दिसंबर को पूर्ण सूर्य ग्रहण रहा। ग्रहण से धार्मिक कर्मकांड, ग्रह नक्षत्र और राशियों पर भी असर माना जाता है।
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17. ग्रह परिवर्तन : सात मार्च 2019 को राहु ने मिथुन राशि में गोचर किया और इस वर्ष 23 सितम्बर 2020 को मिथुन से निकलकर वृषभ राशि में गोचर किया। 07 मार्च 2019 को केतु ग्रह ने धनु राशि में गोचर किया और 23 सितंबर 2020 को धनु राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश किया। इसी तरह शनि वर्ष 2019 में धनु राशि में गोचर करने के बाद 30 अप्रैल को वक्री हुआ और फिर 24 जनवरी 2020 में उसने धनु से मकर राशि में प्रवेश किया। इसी राशी में पूरे वर्ष मार्गी और वक्री होता रहा और 2021 में भी वह मकर राशि में ही रहेगा। बृहस्पति ग्रह ने 5 नवंबर 2019 को अपनी राशि धनु में गोचर किया और फिर 29 मार्च 2020 तक इसी राशि में रहने के बाद मकर में गोचर किया और 30 जून 2020 को पुन: धनु राशि में लौट आए जहां 20 नवंबर 2020 तक रहे और पुन: मकर राशि में गोचर करने लगे। 2020 साल के अंत तक गुरु का संचार मकर राशि में ही रहेगा।
 
18. धार्मिक ट्रस्टों की सेवा : कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के चलते करोड़ों लोगों के खाने के लाले पड़ गए थे। गरीबों के साथ ही जो लोग अपने घरों में कैद थे उनका राशन पानी भी बंद हो गया था। ऐसे में सभी धर्मों के धार्मिक ट्रस्टों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने बढ़चढ़कर भाग लिया और लोगों के लिए राशन और सब्जी की व्यवस्था की। पलायन कर रहे मजदूरों और गरीबों के लिए भोजन के पैकेट वितरण किए गए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित, सेवा भारती, शिरडी साईं ट्रस्ट, तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट आदि कृई ट्रस्टों ने अपने स्तर पर दान दिया।
 
19. योग, ध्यान और आयुर्वेद का बढ़ा प्रचलन : लॉकडाउन और अनलॉक प्रक्रिया के दौरान कोरोना संक्रमण के भय के चलते लोग इससे बचने के उपाय खोजने लगे। कहा जाने लगा की फिटनेस पर ध्यान रखते हुए इम्युनिटी पावर बढ़नाने से इस संक्रमण से बचा जा सकता है अत: लोग जहां योग और प्राणामाय ऑनलाइन सीखने लगे वहीं इम्युनिटी पावर बढ़ाने के लिए आयुष्यमान कढ़ा पीने के साथ ही आयुर्वे‍द के कई नुस्खे आजमाने लगे। सेहत के लिहाज से लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा लें या यूं कहें कि इसे मजबूत कर लें और साथ ही अपना श्वसन तंत्र सक्रिय रखें तो कोई भी बीमारी हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। योगासन के माध्यम से शरीर को आसानी से सक्रिय किया जा सकता है। वर्ष 2020 में कोरोना काल में मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में मेडिटेशन को लोगों ने अपने जीवन में शामिल किया ताकि वे तनावमुक्त रह सकें।
 
20. धार्मिक और जातिवादी चुनाव : यह तो बस कहने की बात थी कि देश में राजनीतिक चुनाव हुआ परंतु जैसा हमने बिहार में देखा कि किस तरह से जातिवाद और धर्म हावी रहा। इसी लॉकडाउन के प्रारंभ में मध्यप्रदेश सरकार गिरी और शिवराज फिर सीएम बने, राजस्थान में भी संकट पैदा हआ था, बिहार में एनडीए को बहुमत मिला और इसके बाद 150 सीटों वाले ग्रेटर हैदराबाद नगर निकाय चुनाव तो राष्ट्रीय स्तर पर लड़ा गया। भाजपा ने हैदराबाद बनाम भाग्यनगर और निजाम-नवाब संस्कृति से छुटकारा दिलाने जैसे वादे किए गए। जिसके चलते भाजपा को 4 से बढ़कर 48 सीटों पर विजय हासिल की तो वहीं दूसरी ओर औवेसी की पार्टी ने अपनी 44 सीटें बररार रखी तो दूसरी ओर टीआरएस ने 55 सीटों पर जीत हासिल की। अब चल रहा है किसान आंदोलन जिसमें भी धार्मिक उन्माद को ढूंढे जाने के प्रयास जारी हैं। खबर है कि इस आंदोलन में कुछ अलगावदी तत्व घुसकर देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं।

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