फाल्गुनी दोस्ती, खुशी का मीठा दरिया है जो आमंत्रित करता है हमें आओ, खूब नहाओ, हंसी-खुशी की मौज-मस्ती की शंख-सीपियां जेबों में भरकर ले जाओ! आओ, मुझमें डुबकी लगाओ, गोता लगाओ खूब नहाओ प्यार का मीठा पानी, हाथों में भरकर ले जाओ...!...