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शादी मार्केट में वकील

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एमके सांघी

प्रश्न : दद्दू, उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि शादी मार्केट में वकीलों  की कोई अहमियत नहीं है। लोग प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में अपनी बेटी का हाथ देने के लिए लालायित रहते हैं किंतु वकील का नाम सामने आने पर उनकी जुबां से 'ना' निकल जाती है। आप क्या  कहेंगे इस बारे में?

उत्तर : देखिए कुछ हद प्रधान न्यायाधीश साहब की बात सही हो सकती है किंतु बात यह भी सही है कि वकीलों को ठुकराकर जब कोई कन्या किसी प्रशासनिक अधिकारी को चुनती है और जब वह कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसता है तो किसी वकील की शरण में ही जाता है। मुर्गा फंसने पर कई घाघ वकील अपने इन प्रशासनिक क्लाइंट को चैम्बर में इंतजार करता छोड़ अपने शयन कक्ष में नींद निकालने चले जाते हैं  और चार गुनी फीस वसूलते हैं, वह अलग। वकील को जो बुद्धिमान कन्या वरती है, उसे ताजिंदगी  कोर्ट-कचहरी का कोई डर नहीं होता। 
 

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