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महेन्द्र साँघी
खुशियों के दो पल उधार दे दो
अपने खजाने से थोड़ा सा प्यार दे दो।
तुम जो कहोगे, तो आकर फिर मिलेंगे न कभी
अपनी नजरों का इकरार, बस एक बार दे दो ।
जमाना याद रखता है असफल प्रेमियों को भी
थोड़ी देर के लिए ही सही, अपना ऐतबार दे दो।
काटने के लिहाज से मुश्किल न होगी जिंदगी
अपने हाथों से छूकर, एक पतवार दे दो।