* यदि आप विवाहित हैं तो ग्रीष्मकाल में अपनी पत्नी को (बच्चों सहित) उसके मायके जरूर भेजें। ताकि उसके माँ-बाप को यह न लगे कि आप पत्नी को बंधन में रखने वाले अत्याचारी किस्म के दामाद हैं। इधर आप चैन की साँसें ले लें।
* पत्नी जब मायके जाए, तो आप दो में से कोई एक काम कर सकते हैं। या तो उसके विरह में कुछ गीत-ग़ज़ल लिखकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध कर सकते हैं। या फिर अपने अंदर छिपे प्रेमी को जगाकर एक छोटा-मोटा, 'रिस्कलेस' और सुफलदायी प्रेम कर सकते हैं।
* हमारी संस्कृति में अतिथि सत्कार की महान परंपरा है। इसे लुप्त न होने देने के लिए आप अतिथि बनकर इस मौसम में मित्रों,
रिश्तेदारों के यहाँ जाएँ, मगर सावधान! अतिथि बनने का कोई भी अवसर उन्हें न प्रदान करें।
* गर्मी में बहस और गर्मा-गर्मी से बचें। सदा प्रसन्न रहें और उधार माँगने वालों से दूर रहें।
* गर्मी में जन्मदिन या विवाह आदि अवसरों पर उपहार देना ही पड़ जाए, तो हाथ पंखा, सुराही और नल की टोंटियों जैसे अभिनव
उपहार देकर भीड़ से अलग नज़र आएँ।