-
देवेंद्र शर्मा
लीजिए, फिर से आ गया
करवा चौथ का पर्व।
बिना बात ही पत्नियाँ
पति पर करेंगी गर्व।।
रेखा में मुस्कान की
आएँगे मोहक Curve
पति की सेवा में होगी
मधुर मिठाई Serve
रोज उतरती लू जिसकी
आज उतरेगी उसकी आरती।
उस पति को पत्नी निहारेगी
कभी जिस पे नजर ना मारती।।
बोझा ढोने वाला खच्चर
आज होगा परमेश्वर।
उस पर शासन करने वाला
होगा आज सरेंडर।।
सजनी छत पर कर चुकी
सजना का जब पूजन।
हाथ को लेकर हाथ में
लगे बोलने साजन----
प्रिये ! नहीं मैं देवता
करो न मेरी पूजा।
और ऐसे मत ठुकराओ
कि बन जाऊँ सहमा चूजा।।
सर पर भी ना बैठाओ
ना ठोकर मुझे लगाओ।
साथ बिठाकर, गले लगाकर
मुझको मित्र बनाओ।।
समता और सद्भाव ही
विवाह-रथ के चक्के।
प्रेम और विश्वास के इसमें
घोड़े जोतो पक्के।।
जीवन तभी सफल होगा
जब प्रेम का होगा भाव।
बिना रुकावट तभी चलेगी
विवाह-युगल की नाव।।
एक-दूजे को दोनों पूजें
जले प्रेम की जोत।
हर दिन वेलेंटाइन डे हो तब
हर शब करवा चौथ।