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चाय की गुमटी

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चाय की गुमटी
Devendra SharmaND
पात्र : काका और वेबू (काका बिट्टू की गुमटी के बगल में पेड़ के नीचे आने-जाने वाले लोगों को अरुचि से ताकते हुए बैठे हैं। इतने में सामने से वेबू तेज गति से चलते हुए गुजरता है)

काका : अरे ओ वेबू ! इतनी हड़बड़ी में कहां जा रहा है? जरा इधर तो आ।

वेबू : (मिलने की उमंग वाले भाव से) ओ माई डियर काकाजी! आप यहां पर अकेले बैठे हैं ? चलो चाय पीते हैं।

काका : (बिट्टू की गुमटी में काम करने वाले छोटे छोरे से) ओ बारीक, दो कट चाय लाना।

वेबू : (गंभीरता से) काका, सुबह का अखबार पढ़ा। (बच्चों जैसा विस्मयकारी चेहरा बनाकर) आपको मालूम है कि देश की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। पढ़कर, सुनकर और टीवी पर देखकर बहुत दुःख होता है।

काका : (ठहाके की ँसी ँसते हुए) हा हा हा हा हा! वेबू भतीजे, इसमें दिल इतना छोटा करने की बात ही क्या है? फिल्म, 'प्यार तो होना ही था' तूने देखी ही होगी। काजोल का अजय देवगन की लाइफ में एंट्री लेते ही सभी दर्शक को पता लग जाता है कि अब 'प्यार तो होना ही है'।

बस, बिलकुल उसी तरह राजनीति में एंट्री लेते ही हम जैसे विशेषज्ञों को ज्ञात हो गया था कि 'ऐसा तो होना ही था।'

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