| हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट।
अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।।
अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना।
द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।
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चेहरे पर है शहद से, भी मीठी मुस्कान।
हँसने को जो फैले होंठ, छू-छू लेते कान ।।
हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट।
अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।।
अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना।
द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।
खूब चकाचक कर दूँगा, तुम लोगों का गाँव।
एक बार बस जिता दो, पडूँ तुम्हारे पाँव।।
जनता सबको जानती, मगर बनी असहाय।
नेता दुहता कपट से, और चुपचाप है गाय।।