वेबू- गंगाराम ! शहरों में प्रदूषण की दर बहुत बढ़ गई है। इससे हमारी बहुत तरक्की होगी, है ना?
गंगाराम- हाँ, सही बात है। शहर में बढ़ते प्रदूषण से हमें हीनता महसूस होती है, पर भविष्य आशाप्रद है।
ज्यादातर किसानों ने यहाँ अपने खेत बेच दिए हैं, ताकि वहाँ उन्नत खेती में सहायक फर्टिलाइजर कारखाने खुल सकें। हा-हा। जितनी फैक्टरियाँ, उतना धुआँ और उतनी ही तरक्की!