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प्रशंसक भी तो पब में थे

- एमके सांघी

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वेबू
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काका : क्यों भई वेबू तुम यह अपना ही सिर क्यों घुन रहे हो?
वेबू : दूसरे का सिर घुनूँगा तो पीट दिया जाऊँगा इसलिए अपना ही घुनना बेहतर है।

काका : मगर क्यों?
वेबू : काका प्रथम टी-ट्‍वेंटी वर्ल्ड कप की विजेता भारतीय टीम की पहले दूसरे वर्ल्ड कप और अब वेस्ट इंडीज में आयोजित तृतीय वर्ल्ड कप में भी करारी हार हो गई।
काका (हँसते हुए) : अरे, इसमें सिर घुनने की क्या बात है। हम भारतीयों को करारी चीज ही भाती है। करारी सिकी रोटी, करारे सिके भजिये, पूरी, करारी जलेबी, करारे कबाब इत्यादि।

वेबू : आप भी काका। करारे शब्द को पकड़कर बैठ गए जबकि महत्वपूर्ण विषय में वर्ल्ड कप सुपर एट में लगातार तीन हार।

काका हार स्वाभाविक हो तब तो ठीक है मगर पता चला है कि हमारी टीम आईपीएल के मैचों में खेल-खेलकर थक गई थी। ऊपर से तुर्रा यह कि मैच के बाद देर रात की पार्टियों ने खिलाड़ियों को जमकर थका दिया।

काका : वेबू तुम तो बुद्धू ही रहे। हमारे जमाने में जब हम खेलकर थक जाते थे तब पहलवानों से हाथ-पैर दबवा लेते थे।
आजकल खिलाड़ी थक जाते हैं तो पब पार्टियों में जाकर सुरा सेवन करते हैं और सुंदरियों के साथ डांस करते हैं। आजकल के सभी युवा अपनी थकान इसी तरीके से दूर करते हैं।

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वेबू : काका, यदि थकान वाली बात मान भी लें तो टीम का चयन ठीक नहीं हुआ। खुद कोच बता रहे हैं कि टीम के 3 खिलाड़ी फिट ही नहीं थे। 8 ओवरवेट थे।
काका : देखो वेबू, अपनी छोटी समझ में फिट खिलाड़ी वह जो टीम में फिट हो जाए। अनफिट वह जो फिट होने से रह जाए।
चयन समिति अपनी तरफ से भरसक कोशिश करती है कि सही फिटनेस वाले खिलाड़ी ही चुने जाएँ। इसके लिए वह जाँचती है कि खिलाड़ी की वरिष्ठता के क्रम में कितनी ऊँची छलाँग है, पुराने ‍रिकॉर्डों के मामले में कितनी लंबी दौड़ है, पहुँच तथा संबंधों की कितनी ऊँची कूद है, क्षेत्रीयता के जोड़ तथा मांसपेशियाँ कितनी मजबूत हैं और अंत में खिलाड़ी की कप्तान से दोस्ती में कितना दमखम है और तब अंतिम चयन करती है। बेचारी चयन समिति की स्थिति कन्या के उस पिता के समान है जो अपनी बिटिया के लिए कितना ही अच्‍छा वर क्यों नहीं ढूँढ लाए, लोग कुछ न कुछ कमी बताकर कह देते हैं कि लड़की को कुएँ में धकेल दिया।

एक बात और सुन वेबू प्यारे दुनिया में अनफिट लोगों ने भी बड़े-बड़े कारनामे किए हैं। अब देखो आदमी की फिटनेस बकरी के मुकाबले थोड़ी सी ही बेहतर होती है फिर भी शेर जंगल से लुप्त हो रहे हैं।

वेबू : मगर काका चुने ‍हुए खिलाड़ियों में से 8 ओवरवेट हैं, ऐसा कोच का कहना है।
काका : अब उन्हें कुछ छूट तो देनी ही पड़ेगी। सभी स्टार खिलाड़ी विज्ञापन करते हैं जिनमें उन्हें कीड़ी-काँप नहीं बल्कि खाए-पिए दिखना होता है।

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वेबू : काका मगर टीम के खिलाड़ी बाउंसर और शॉर्टपिच गेंदें खेलने में असफल रहे।
काका : वह क्या है कि हम भारतीयों को छोटेपन से सख्त नफरत है। इसलिए हमारे खिलाड़ी शॉर्टपिच गेंदों को छोड़ देते हैं। रही बाउंसर नहीं खेल पाने की बात तो वह सरासर झूठी है। अब बताओ आईपीएल में हमारे खिलाड़ियों ने इतना माल कूटा। क्या आज तक उन्हें मिला कोई चेक बाउंस हुआ। नहीं ना! मतलब खिलाड़ी बाउंसर अच्छी तरह खेलते हैं।

वेबू : काका आपने टीम की तरफदारी सचिन और अमिताभ बच्चन जी से भी अच्छी तरह की मगर यह तो बताइए कि क्या टीम के खिलाड़ियों को हार के पश्चात पब में जाकर नाचना-पीना शोभा देता है। पता चला है कि पब में मौजूद प्रशंसक खिलाड़ियों को पब में देखकर बहुत दुखी व आश्चर्यचकित हो गए और उनसे विवाद कर बैठे।

काका : वेबू, जरा यह तो बताओ कि हार के पश्चात वे प्रशंसक खुद पब में क्या कर रहे थे।
क्या उन्हें अपनी होटल में मुँह छुपाकर हार का दुख नहीं मनाना चाहिए था। जो प्रशंसकों ने किया वही खिलाड़ियों ने। फिर शिकायत कैसी?
वेबू (आत्मसमर्पण की मुद्रा में झुकते हुए) वाह काका! आपसे जीतना बड़ा ही मुश्किल है।

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