लल्लू - 'सर! पिछले महीने हमारे घर हुई थी शोक की बैठक।
जब हमारी दीदी, कॉलोनी के एक भइया के साथ निकल ली थी', तब बहुत सारे लोग बैठने आए थे हमारे यहाँ।'
रॉकी - 'नहीं सर! शोक की बैठक तो वर्मा जी के यहाँ हुई थी। बेचारों ने 'करोड़पति' का नंबर दिन-रात ट्राइ किया मगर उनका नंबर तो आया
नहीं, हजारों का भारी-भरकम टेलिफोन बिल जरूर आ गया था।'