-
महेन्द्र सांघी
काका : कहो वेबू पिटा-सा मुँह लेकर कहाँ से चले आ रहे हो। तुम्हारा चेहरा उदास और अनमना क्यों है। आँखों में शून्यता लिए हुए तुम खोए-खोए से क्यों हो!
वेबू : चिढ़कर! काका आपकी तरह हमेशा हँसते रहना क्या जरूरी है।
आजकल जमाना ऐसा है कि जरा खुश दिखे कि यार-दोस्त, पड़ोसी समझते हैं कि इसके पास मुफ्त का माल आ गया है और वे उधार माँगने आ जाते हैं।