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शशीन्द्र जलधारी
ओ भैया...ओ बहना...तुम
वोट डालने अवश्य जाना।
ये आलस कर जाएँ मैया
मत देना इनको खाना।
यह मत सोचना तुम्हारे सिर्फ
एक वोट की क्या है कीमत।
वोटों की ताकत से ही
बदलेगी इस प्रदेश की किस्मत।
सरकार बनाने में है समझो
हर एक वोट की अहमियत।
एक-एक ईंट जुड़कर ही
तो खड़ी होती है इमारत।
स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर
करना तुम मतदान।
तुमको साबित करना है
सजग नागरिक की पहचान।
चुनाव जीतते ही ये
क्यों भूल जाते हैं इलाका।
चुनाव आते ही क्षेत्र छोड़कर
नाम नहीं लेते जाने का।
ये कैसा है इनका व्यवहार।
जो भूल जाते हैं उपकार।
पहले खुद आते वोटर के पास।
फिर सुनते नहीं उनकी पुकार।
मतदाता के पैरों को छूने
में होती नहीं हिचक।
फिर मालिक के पास जाने से
क्यों कतराता है सेवक।
क्षणिक फायदा देख तुम
अपना वोट गँवाना मत।
खुद ही अपने लिए कभी
तुम बुलाना मत आफत।