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सबसे बड़ा ज्योतिषी

- सत सोनी

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हास्य व्यंग
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मेरा तोता बीमार था। उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। डॉक्टर की दवाई से भी ठीक नहीं हुआ तो मैं एक ज्योतिषी के यहाँ गया। वे बोले, 'मैं पशु-पक्षियों का भविष्य नहीं बताता।'

मैंने कहा- 'पंडितजी, जब कंकड़ानुमा जीव पोथे-पत्री के बिना ही मनुष्यों का भविष्य बता देता है तो मनुष्य जानवरों का भविष्य क्यों नहीं जान सकता? उनके माथे पर शिकन आ गई : 'मेरी तुलना आप पशु-पक्षी से कैसे कर सकते हैं। ऑक्टोपस ने विश्व कप फुटबॉल में टीमों की हार-जीत के बारे में सही-सही बताया तो उसका कारण यह था कि उसे पहले से ही सिखा दिया गया था।'

मैंने कहा : 'इसका मतलब तो यह हुआ कि ऑक्टोपस का गुरु दुनिया का सबसे बड़ा ज्योतिषी था।'

पंडितजी ने सिर हिलाया :"हरगिज नहीं। देखिए, आप जब किसी से कहते हैं कि तुम जरूर जीतोगो तो वह आत्मविश्वास से भर उठता है। कहेंगे कि तू हारेगा तो वह गलत कदम उठाकर अपनी हार सुनिश्चित कर लेता है। हम ज्योतिषी ग्रहों का अध्ययन करते हैं कि कौन-सा ग्रह किस घर में है।" मैंने तो जब भी किसी ज्योतिषी से अपना भविष्य जानना चाहा तो यही सुनने को मिला कि फलां ग्रह इस घर में बैठा है और फलां ग्रह उस घर में। आज तक समझ नहीं सका हूँ कि ये ग्रह इतनी जल्दी-जल्दी घर क्यों बदलते रहते हैं।

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पंडितजी ने पूछा :"क्या सोच रहे हैं?"

मैंने कहा : 'अच्छा, यह बताइए कि क्या आपको मालूम था कि आज क्या होने वाला है।'

कहने लगे : 'मुझे प्रातःकाल ही ज्ञात हो गया था कि एक व्यक्ति अपने तोते के बारे में पूछने आएगा और ऊलजलूल प्रश्न करेगा।'

मैंने कहा : 'अरे, कमाल कर दिया आपने, बताइए अब मैं क्या करूँ।'

बोले : '501 रुपए निकालो।' होते-होते वे 201 रुपए पर आ गए। उन्होंने टीन का बना एक छोटा-सा ताबीज मुझे दिया और बताया 'दो बातें नोट करें। एक तो अपने तोते की उम्र की तोती लाकर उसे तोते के पिंजरे में ही रखें। दूसरा, यह कवच पिंजरे में लटका दें। जैसे ही वह स्वस्थ हो जाए, इसे नदी में बहा दें।" मैंने दोनों ही बातों पर अमल किया। तोती को पाकर तोता चहकने लगा और उसने खाना-पीना शुरू कर दिया।

दस दिन के बाद मैं ताबीज को नदी में बहाने के लिए गया। यमुना के पुल पर खड़े-खड़े खयाल आया कि आखिर इसके भीतर ऐसा कौन-सा मंत्र है जिसने मेरे तोते पर जादू कर दिया। मैंने जरा जोर लगाकर कवच को खोला। उसमें से एक छोटी-सी पर्ची निकली। उस पर लिखा था : 'कजरारे, कजरारे तेरे कारे-कारे नैना!'

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