| आगरा नगरी हो गई
आज अचानक धन्य ।
सभ्य लोग भी हो चले
नियम तोड़कर वन्य ।।
ताजमहल की छटा में
आया अजब निखार।
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आगरा में है उत्सव।
ऐसे में ना अमरसिंह हों,
ऐसा कैसे संभव?
नाजो-अदा की वो मलिका
जब काट चुकेगी केक ।
दाढ़ीयुक्त मुस्कान लिए
देंगे बधाई अभिषेक।।
उधर बोलते बनवारी,
गजब हो गया बाबू।
ऐश मैडम में है जरूर
कोई पावरफुल-सा जादू।।
वो चौंतीस की क्या हुईं,
हुई जादुई बात।
देखो; मेरी बत्तीसी में
दो और उग आए दाँत।।