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हॉटलाइन पर

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हॉटलाइन पर
- अशोक चक्रध

ND
हलो, समझ गया न ?
हाँ, समझ गया।
क्या समझा ?
वही जो तू बोला था हीरो !
ओह पी.के.
यार डोंट कॉल मी हीरो।
यू नो
आई एम एन इंटरनेशनल
फोर टू जीरो।

अच्छा तो तू अपने आपको
फोर ट्वैंटी मानता ?

मेरे मानने से क्या है
इसे तो बच्चा बच्चा जानता।
पी.के. डू यू रियलाइज कि
मेरे जितने काम हैं न
उनसे ज्यादा मेरे फेस हैं ?

हाँ वो तो ठीक है
पर ये बता
तेरे ऊपर कितने सूट फाइल हैं
कोर्ट में कितने केस हैं ?

पी.के.
सूट और केस से
मेरा क्या बिगड़ता है रे
मेरे पास तो सूटकेस हैं

हलो,
ये फोन पे
तालियों की आवाज
कहाँ से आ रही है ?

कुछ नहीं
पड़ोस के हॉल में
कविता सुनाई जा रही है।
खैर छोड़
बैंक ऑफ पूना को
जो चूना लगाया,
उसका कितना माल
स्विस खाते में आया ?

वो तो सब
कम्प्यूटर में फीड है
पर ये बता
चेयरमैन को कैसे पटाया ?

पी.के. इस हुनर में
कोई नहीं कर सकता
मेरी बरोबरी,
बेटा !
रौब से होती है रॉबरी।
तू जानता है
आजकल
बैंक डकैती की छानबीन
बड़ी देरी से होती है,
क्योंकि डकैती
पिस्तौल बंदूक से नहीं
कलम की हेराफेरी से होती है।

देख हमने दिया।
हुँ।
उन्होंने लिया।
हूँ।
फिर उन्होंने दिया
राइट
और हमने लिया
ओ.के.
सो सारा खेल है ब्रेन का,
लेन-देन का।
ये तो भैया
बीच की
म्यूचुअल अंडरस्टैंडिग है
अच्छा बता
कौन सा पैडिंग हैं ?

ए. के लिए जो बोला था तू
वो मैं दे दिया।
अच्छा और बी.डी. ?

उसने भी
बड़े प्यार से ले लिया।

ओ.के. !

डी.पी. को
बीस का फिगर बोला मैं।

ठीक है, फिगर जमती है।

लेकिन वो बोला
कमती है।

क्या ?
कमती बोला वो
शैतान की औलाद !

हाँ, वो भी लेने के बाद !

फिर ?

फिर क्या मेरा सिर !
मैं बोला नामुमकिन,
आजा होलीडे इन
मेरे सामने बैठके गिन।
इस मामले में
अभी तक
हमारी साख नईं गिरी,
कमती निकले तो
हजार शेयर फिरी।
खम्बानी के।

यानी के...अच्छा, दैन वो आया ?
नईं, मैसेज भिजवाया।
कैसे ?
लिख के चिट्ठी में।

फिर तो वो मिल गया मिट्टी में।
चिट्ठी संभाल के रखना,
और फिर देखना
उसका बिलखना।
लेकिन यार
ये सूट केस का मामला
हो गया संजीदा !

खाक संजीदा,
अरे वी.आई.पी. के पास जाना था
इसलिए वी.आई.पी. का ही
सूटकेस तो खरीदा।

वो तो सब ठीक है,
पर मामला बारीक है।
वो पूछते हैं
इतना इसके अंदर कैसे आया ?
तो मैं भर के दिखाया।
सारा माल
अंदर करके दिखाया
उठा के दिखाया
घुमा के दिखाया।

अच्छा,
अटैची तूने घुमाई थी ?
हाँ यार।
जेठमलानी ने
दो दिन तक तो प्रैक्टिस करवाई थी।

यार अपना मुल्क भी
कमाल है,
जिसको घुमाने वाला
एक दलाल है।
बीस हजार करोड़ का
पेट में कोई मरोड़ नईं है
एक करोड़ के नाम पे
रोता है,
हमारे यहाँ ऐसा ही होता है।

हलो,
ये सब जनता का प्रताप है,
वो इस बात को जानती है
कि बीस हजार करोड़ में
मेरी मेहनत थी
एक करोड़ में
उनका पाप है।
वो जानती है कि
कौन असली विधाता है,
चुनाव का खर्चा
आसमान से नहीं आता है।
अगर तुम नहीं जानते
कि सरकार कैसे चलती है
तो ये तुम्हारी गलती है।
अच्छा लीव इट यार
मैं एक गाना सुनाता हूँ।

डॉण्ट जोक यार
तू और गाना ?

हाँ शेयर नहीं बन रहे हैं
तो शुरू कर दिया है
शेर बनाना।
अब छोड़ सारी उधेड़ बुन
गाना सुन।
झोली के नीचे क्या है...

क्या बोला चोली के नीचे क्या है?
तेरे सामने तो शायरी होली !
अफसोस कि मैंने
सुनने के लिए तुझको चुना !

ठीक है, ठीक है
पर गाके सुना।

झोली के नीचे क्या है,
थैली के पीछे क्या है।
हलो सुन रहा है
मैंने क्या कहा है?

सुनाए जा डीयर,
साउंड इज एकदम क्लीयर।

सुन !
झोली के नीचे क्या है
झोली के नीचे,
थैली के पीछे क्या है
थैली के पीछे,
थैली में रुपया मेरा
ये रुपया दूँगा अपने उद्धार को,
सरकार को।
फुक फुक फुक फुक फुक फुक....

हलो ये फुक फुक फुक क्या है ?

हलो,
सुन तो !
फुक जाए रुपया कितना
दे दूँगा माँगें जितना
भर दूँ नोटों से उनके
परिवार को,
घरबार को।
फुक फुक फुक फुक फुक फुक
झोली के नीचे क्या है,
थैली के पीछे क्या है।

वाह क्या बात कही है
असली खलनायक का गाना तो यही है।
हो जाय ताली।

हलो
ताली तूने अकेले बजाई थी ?
हाँ!

फिर इतनी सारी
तालियों की आवाज
कहाँ से आई थी ?
अच्छा अभी रखता हूँ
लगता है
हॉटलाइन पर कोई
सुन रहा है।
अरे सुनने वालों सुन लो
ये तो मैंने
खुल्लमखुल्ला कहा है
कि आजकल नेताओं का
मुँह खुला है,
यहाँ कौन दूध का धुला है ?

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