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'बादलों' के साये में जेटली का नामांकन

-अमृतसर से दीपक असीम

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नामांकन भरते समय भी एक शपथ चुनाव अधिकारी के सामने भी लेनी पड़ती है कि मैं संविधान के अनुसार ही चुनाव लड़ूंगा, नियमों का पालन करूंगा और यह शपथ अरुण जेटली ने पंजाबी में ली। सोमवार को अमृतसर के डीसी ऑफिस में उनके साथ थी उनकी पत्नी संगीता और बेटी सोनाली। साथ ही थे कुछ और कार्यकर्ता।

तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक पास ही में एमके लॉन से उन्हें चंद समर्थकों के साथ कुछ दूर पैदल चलना था और फिर इधर आ जाना था। मगर एमके लॉन में शिरोमणी अकाली दल और भाजपा के कार्यकर्ताओं का वो जमघट लगा कि हजार-दो हजार लोग इकट्‌ठा हो गए। ये एमके लॉन नवजोतसिंह सिद्धू के मकान के बगल में ही है। सिद्धू के मकान को इधर 'सिद्धू जी की कोठी' कहा जाता है।

अरुण जेटली के साथ उनके कुछ दोस्त भी दिल्ली से आए हुए हैं। सबके सब होटलों में रुके हैं। सबके सब ग़लती से पहुंच गए एमके होटल, क्योंकि वो भी बहुत मशहूर है। अपनेराम भी गलती से पहले वहीं पहुंचे थे। वहीं पर मुलाकात हुई उनके दोस्त राजपाल जी से। उन्होंने मेहरबानी कर एमके लॉन तक अपनेराम को लिफ्ट भी दी। रास्ते में बातें हुईं तो मालूम पड़ा कि जेटली भी इस सीट को आसान नहीं समझ रहे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिख-नॉनसिख का कार्ड खेल दिया है। जेटली नॉनसिख हैं। राजपाल जी ने यह भी बताया कि जेटली ने फिलहाल लारेंस रोड पर एक मकान ले रखा है नाम है चोपड़ा हाउस। हालांकि उनके अपने दो प्लाट अमृतसर में हैं। राजपाल साहब का कहना है कि पार्टी ने सिद्धू का टिकट इसलिए काटा क्योंकि शिरोमणी अकाली दल से सिद्घू का जबरदस्त पंगा हो गया था और अगर सिद्धू को टिकट मिलता तो वे हार जाते।

सवाल यह है कि क्या जेटली जीत जाएंगे? राजपाल जी कहते हैं चुनाव टफ है। मगर यदि जेटली जीत जाते हैं तो तीन लोग मिलकर देश को चलाएंगे। मोदी, राजनाथ और जेटली। अमृतसर में आज सुबह बारिश हुई है। बादल छाए हुए हैं। कुर्सियां गीली हो गई हैं और मंच पर लगी छत भीगकर झूल गई है, मगर एमके लाउंज में जबदस्त भीड़ है। मंच ओवरलोड है। मंच पर शिरोमणी अकाली दल के नेता और कार्यकर्ता भाजपा नेताओं से ज्यादा हैं। एक आदमी दिखने में मोदी जैसा है, लोग इसका मजा ले रहे हैं।

सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी आ गई हैं। उन्हें मंच पर बैठाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी हैं, जो पंजाबी में भाषण शुरू करके हिंदी पर आ जाते हैं। भाजपा के झंडे ज्यादा हैं शिरोमणी अकाली दल के कम। मंच से नारे लगवाए जाते हैं- देश का नेता कैसा हो? जवाबी नारा गूंजता है- प्रकाश सिंह बादल जैसा हो...कुछ कमजोर आवाजें नरेंद्र मोदी का नाम लेती हैं, मगर प्रकाशसिंह बादल के शोर में मोदी के नामलेवा दब जाते हैं। वाकई यहां प्रकाश सिंह बादल ने मोदी को दबा रखा है। चौराहों पर जो बड़े होर्डिंग लगे हैं, वो भी अन्य शहरों जैसे नहीं हैं, जिसमें सिर्फ मोदी है। यहां पर दो तरह के होर्डिंग हैं। एक पर अरुण जेटली का चेहरा सबसे बड़ा है। पीछे मोदी और प्रकाश सिंह बादल हैं। बादल यहां के मुख्यमंत्री हैं। दूसरी तरह के पोस्टर में मोदी के साथ केवल प्रकाशसिंह बादल हैं। मोदी का फोटो पांच-दस फीसद ही बड़ा है।

जाहिर सी बात है कि अन्य शहरों में प्रचार मोदी की मर्जी से हो रहा है, मगर यहां चूंकि दोनों का गठबंधन है, सो बादल की भी चल रही है और कार्यकर्ता मोदी को कम भाव दे रहे हैं। जो लोग सिख नहीं हैं, वे अकसर मोदी के तरफदार हैं। बहरहाल जेटली एमके लॉन से निकलते हैं। कुछ दूर पैदल चलते हैं। उनके पीछे हजार लोगों की भीड़ है। वे एक कार्यकर्ता को समझाते हैं कि इस तरह चले तो रोड शो जैसा हो जाएगा और इसकी परमिशन हमने नहीं ली है। एक गाड़ी आती है और वे गाड़ी में बैठ कर सीधे डीसी ऑफिस चले जाते हैं। डीसी ऑफिस पहुंचकर वे पत्नी और बेटी का इंतज़ार करते हैं। जब दोनों आ जाती है, तो सीधे अंदर चले चले जाते हैं, पंजाबी में शपथ लेने और नामांकन भरने

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