अमेठी में राहुल का विरोध, प्रियंका भी परेशान

गुरुवार, 1 मई 2014 (15:06 IST)
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लखनऊ। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जहां सारे देश में पार्टी के लिए प्रचार कार्य रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय लोगों को उनकी कमी नहीं खल रही है क्योंकि उनकी छोटी बहन प्रियंका गांधी राहुल के गढ़ में लोगों की नाराजगी का सामना कर रही हैं।

दस वर्षों के बाद अमेठी के लोग उनके प्रति राहुल गांधी की मंशा को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। प्रियंका खुद सभाओं को संबोधित कर रही हैं, लेकिन स्थानीय उनकी संख्या में सभाओं में नहीं आ रहे हैं जितनी की पार्टी उम्मीद करती है।

फर्स्टपोस्ट डॉट कॉम ने अपने एक डिस्पैच में लिखा है ‍कि भदार ब्लॉक के पीपारपुर गांव में लोग बहुत अधिक संख्‍या में नहीं पहुंचे। गांव के किसान भूरेलाल का कहना है, 'हम राहुलजी से खुश नहीं हैं। हमें बिजली का वादा किया गया था, लेकिन हम अभी भी इसका इंतजार कर रहे हैं।'

एक 52 वर्षीय किसान ने यूपीए-2 की फ्लैगशिप स्कीम मनरेगा को लेकर सवाल उठाए। उसका कहना था कैसा मनरेगा? हमें कोई काम ही नहीं मिलता है। सरकारी कागजी खानापूर्ति के लिए नाम रजिस्टर में दर्ज किए जाते हैं और पैसा भी बंट जाता है और जो कर्ता-धर्ता लोग हैं वे समझते हैं कि गरीबों की मदद हो रही है।'

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ऐसा नहीं है कि अमेठी में कुछ नहीं किया गया है। पिछले दस वर्षों के दौरान 200 करोड़ से ज्यादा सड़क सम्पर्क को बनाने के लिए खर्च किए गए हैं। यहां एफडीडीआई (फुटवेयर डिजाइन ऐंड डेवलपमेंट इंस्टीट्‍यूट), इंदिरा गांधी सिविल एविएशन यूनिवर्सिटी, राजीव गांधी इंस्टीट्‍यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी समेत बहुत सारे शिक्षा संस्थान बनाए गए हैं।

लेकिन, जब क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की बात आती है तो प्रियंका को जवाब देने में खासी दिक्कत होती है। संग्रामपुर ब्लॉक के अंबरपुर गांव में अपने भाषण में प्रियंका ने कहा, 'मुझे पता है कि इस इलाके में बिजली की कमी है। इस मामले में सोनियाजी ने मुलायमसिंह जी से बात की है।

...और फिर निशाने पर आ जाती है भाजपा... पढ़ें अगले पेज पर...


इसके लिए वे भाजपा को दोष देती हैं। उनका कहना है कि 'जब हमने राज्य सरकार से बिजली के मुद्दे पर बात की तो भाजपा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका लगा दी जिसमें पूछा गया कि अन्य जिलों की तुलना में केवल अमेठी और रायबरेली को ही क्यों बेसमय और निर्धारित से अधिक बिजली दी जा रही है?

जब वे आपसे वोट मांगने आएं तो आप उनसे पूछें कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। किसी को भी आश्चर्य हो सकता है कि लोग राहुल से नाराज क्यों हैं? राहुल क्षेत्र में जिस तरह का ''विकास'' करना चाहते हैं वह तो ठीक है, लेकिन इससे क्षेत्र के लोगों की बुनियादी समस्याएं नहीं सुलझ रही हैं।

गांधी परिवार और स्थानीय लोगों के बीच जो सीधा संबंध बना हुआ था वह कम हो गया लगता है। लोगों का कहना है कि राहुल समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रबंधन को लेकर कुछ नहीं करते। अमेठी के स्‍थानीय नेता और कार्यकर्ता राहुल से नाराज हैं।

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एक स्थानीय नेता ने अपना नाम गोपनीय रखे जाने की शर्त पर कहा कि अगर राहुलजी अपने वादों पर कोई फॉलो अप करते तो प्रियंका की सभाओं में इतनी कम भीड़ नहीं जुटती। अमेठी में करीब 2 लाख ब्राह्मण, 3 लाख मुस्लिम और चार लाख दलित वोट हैं। ये तीन समुदाय ही चुनावों का फैसला करती हैं।

अब तक लोग सोचते थे कि दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों का समीकरण से राहुल की सीट निकल जाएगी लेकिन अब ऐसा नहीं है। ब्राह्मण वोट भाजपा की स्मृति ईरानी और कुमार विश्वास के बीच बंट गए हैं। कांग्रेस के अमेठी में एक नेता अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि पार्टी के तयशुदा वोट हैं और कांग्रेस विरोधी वोट बंट रहे हैं, लेकिन कोई भी देख सकता है कि राज्य में लोगों का मूड कांग्रेस के खिलाफ है। प्रियंका न केवल इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं वरन् उन्हें अमेठी में कांग्रेस समर्थकों की निराशा से भी जूझना पड़ रहा है। वे लोगों से कहती हैं कि यहां के लिए राहुलजी की बहुत बड़ी योजनाएं हैं।

स्थानीय लोगों की समस्या है कि गर्मियों में फसलों के लिए पानी, बिजली नहीं मिल रही है। भले ही राहुल अमेठी को एक आदर्श चुनाव क्षेत्र बनाना चाहते हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का निदान करने के लिए उनके पास दस वर्ष थे लेकिन वे दस वर्ष में यह भी नहीं कर सके हैं इसलिए लोगों का विश्वास उनकी बातों से खत्म हो रहा है। इस बार गांधी परिवार को यह नाराजगी परिणाम में देखने को मिलेगी।
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