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गुजरात चुनाव आयोग का बड़ा आदेश, सोशल मीडिया कैंपेन पर होने वाले खर्च का हिसाब देना हुआ अनिवार्य

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Big Order by Gujarat Election Commission Regarding Election Expenses
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है, ऐसे में राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गांधीनगर से मिली जानकारी के अनुसार, अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को सोशल मीडिया पर किए जाने वाले प्रचार का हिसाब भी अनिवार्य रूप से देना होगा। इस आदेश के कारण अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले खर्च पर भी आयोग की सीधी नजर रहेगी।

डिजिटल प्रचार पर आयोग की पैनी नजर

वर्तमान समय में चुनाव प्रचार केवल रैलियों या सभाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रचार का मुख्य हथियार बन गए हैं। उम्मीदवार इन प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन और कैंपेन चलाते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल माध्यमों के पीछे होने वाला सारा खर्च अब उम्मीदवार के आधिकारिक चुनावी खर्च में गिना जाएगा।

पारदर्शिता और खर्च पर नियंत्रण

चुनाव आयोग के नए आदेश के अनुसार, उम्मीदवारों को पेड एडवरटाइजमेंट (Paid Advertisement), सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डिजिटल सामग्री बनाने के पीछे हुए खर्च का विवरण देना होगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य चुनाव में होने वाले बेहिसाब खर्च पर रोक लगाना और प्रत्येक उम्मीदवार को समान अवसर प्रदान करना है। इस नए नियम से आगामी चुनावों में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी लगाम लगने की संभावना है।
Edited By : Chetan Gour

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