Publish Date: Wed, 04 Nov 2015 (16:39 IST)
Updated Date: Wed, 04 Nov 2015 (16:46 IST)
कोलकाता। जल्दी ही एक ऐसा खास कोड आ सकता है जो किसी मरीज के चिकित्सीय इतिहास की जानकारी देने में सक्षम होगा। इस कोड का इस्तेमाल देश के भीतर और बाहर के चिकित्सीय संस्थान कर सकते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘चिकित्सा की व्यवस्थित नामावली-चिकित्सीय शब्द’ (एसएनओएमईडी सीटी) को मेडिकल रिकॉर्ड में इस्तेमाल किए जाने वाले चिकित्सीय शब्दों के मानक के रूप में अपनाया है।
एसएनओएमईडी सीटी स्वास्थ्य आईटी उद्योग में कोडिंग का एक चर्चित मानक है। यह एक समग्र चिकित्सीय शब्दावली है, जिसका सृजन कॉलेज ऑफ अमेरिकन पैथोलॉजिस्ट्स ने किया था। अप्रैल 2007 तक इसका स्वामित्व, रखरखाव और वितरण अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य शब्दावली मानक विकास संगठन (आईएचटीएसडीओ) के पास था। इस समय 28 देश आईएचटीएसडीओ के सदस्य हैं।
विश्वभर में इस्तेमाल की जाने वाली यह समग्र एवं बहुभाषी स्वास्थ्य शब्दावली चिकित्सीय शब्दों के मानकीकरण में मदद करती है। ताकि अस्पतालों और स्वास्थ्यसेवा प्रदाताओं द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) में इनका इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ ही यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग ईएचआर उपलब्ध करवाने में भी मदद करती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में एसएनओएमईडी सीटी के वितरण एवं प्रबंधन के लिए ‘नेशनल रिलीज सेंटर’ के संचालन की जिम्मेदारी सी-डैक (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग) को दी है।
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रमुख सूचना अधिकारी अरविंद शिवरामकृष्णन ने कहा कि, ‘आज भारत हेल्थकेयर आईटी के क्षेत्र में बड़े बदलावों से गुजर रहा है। समग्र स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था की ओर बढ़ने के पीछे उद्देश्य यह है कि अस्पतालों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक चिकित्सीय रिकॉर्ड के रखरखाव की एकीकृत प्रणाली हो और देश में प्रत्येक व्यक्ति को उसका ईएचआर मिल सके।’ (भाषा)