मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उत्तरायण सूर्य की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन का धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व है। मकर संक्रांति का पर्व खेतों में खुशहाली का प्रतीक है और यह न केवल हिंदू धर्म के लोगों के लिए, बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले सभी लोगों के लिए एक खुशी और समृद्धि का संदेश लेकर आता है।
मकर संक्रांति का महत्व: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश को लेकर मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण यात्रा शुरू होती है, जो छह महीने तक चलती है और इसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण में आने से ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
यह पर्व कृषकों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह फसल कटाई का समय होता है और इस दिन को लेकर खेतों में काम करने वाले किसानों के चेहरों पर खुशी और उल्लास की झलक होती है। इस दिन सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्व है। लोग सूर्योदय से पहले स्नान करके सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
तिल और गुड़ का दान किया जाता है और यह परंपरा 'तिल गुड़ खाओ, मीठा बोलो' के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन दान का भी बड़ा महत्व है, जो पुण्य प्राप्ति का कारण बनता है।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व: मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे लोहड़ी के नाम से जाना जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे मकर संक्रांति के नाम से ही मनाया जाता है, जहां महिलाएं एक-दूसरे को तिल और गुड़ का लड्डू देती हैं और एक-दूसरे के साथ खुशी साझा करती हैं।
पोंगल के दौरान दक्षिण भारत में विशेष रूप से नए धान की पहली कटाई के बाद परिवार और गांव के लोग एक साथ मिलकर इसे मनाते हैं। पोंगल के दौरान घरों में विशेष पकवान बनते हैं और सूर्य देव की पूजा होती है। इस दिन को लेकर खेलों और उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है, जैसे कि तामिलनाडु में कम्बला (भैंसों की दौड़) और काट्टू (तिल के पकवान बनाने) जैसी परंपराएं हैं।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का महत्व: मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का विशेष महत्व है। तिल और गुड़ का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। तिल में आयरन और गुड़ में शक्ति देने वाले तत्व होते हैं। लोग इस दिन तिल और गुड़ का दान करते हैं, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में समृद्धि आती है। साथ ही, तिल और गुड़ का सेवन सर्दियों में शरीर को गर्मी और ताकत प्रदान करता है। यह परंपरा समाज में सकारात्मकता, दया और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है।
पतंगबाजी का पर्व: भारत में, मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रूप से पतंगबाजी का आयोजन होता है। इस दिन पतंग उड़ाना एक पारंपरिक और उत्साही गतिविधि है। इस अवसर पर विशेष रूप से गुड़ और तिल के लड्डू बनाए जाते हैं, और लोग इन्हें एक-दूसरे को उपहार में देते हैं।
इसके साथ ही, पतंगबाजी का आयोजन भी किया जाता है, जो इस दिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। इसे गुजरात में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है, और इस दिन को लेकर वहां विशेष मेला और उत्सव आयोजित किए जाते हैं। यह दिन न केवल पतंगबाजी का होता है, बल्कि लोग संगीत, नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रमों का आनंद भी लेते हैं।
उपसंहार: मकर संक्रांति समाज में सकारात्मकता, उत्साह, और धार्मिक एकता का संदेश देती है। यह पर्व न केवल भारतीय संस्कृति की समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह लोगों को समाज सेवा और समानता की दिशा में भी प्रेरित करता है। तिल और गुड़ का दान, सूर्य देव की पूजा और खेल-कूद की गतिविधियां इस पर्व को और भी रोचक और मंगलमय बनाती हैं। इस दिन लोग अपने पुराने झगड़े भूलकर एक-दूसरे के साथ खुशी और प्यार बांटते हैं, जो सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देता है।
इस दिन हमें यह सीख मिलती है कि हमें जीवन में सकारात्मकता, सत्य और समानता के मार्ग पर चलना चाहिए। मकर संक्रांति का पर्व हमें अपने जीवन में बदलाव लाने और नये उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
ALSO READ: Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर किस देवता की होती है पूजा?