ना फटकार से ना जूतों की बौछार से : यह है राखी का मजेदार जोक

प्रेमिका (अपने मनचले से) - ना पिताजी की मार से, 
...ना मां की फटकार से, 
...ना जूतों की बौछार से। 
तुम्हारे जैसे लोग सुधरेंगे रक्षाबंधन के त्योहार से... । 

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