ऑपरेशन थिएटर के बाहर आते ही डॉक्टर साहब बोले - सॉरी घोंचूजी...! हम आपकी बेटी को नहीं बचा पाए। इतना सुनते ही घोंचूजी 100वें माले से कूद गए। जब वह 50वें माले पर आए तो उसे याद आया की उनकी तो कोई बेटी ही नहीं है। 25वें माले पर आए तो उसे याद आया कि अभी तो उनकी शादी भी नहीं हुई है। 10वें माले पर आते-आते उन्हें याद आया की मेरा नाम घोंचू नहीं पोंचू है।