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साहित्य का 'नोबेल' पाने वाले पहले एशियाई: आखिर क्यों रवींद्रनाथ टैगोर ने लौटा दी थी अंग्रेजों की दी हुई 'नाइटहुड' की उपाधि?

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इमेज में हिन्दी के साहित्यकार और गीतांजलि काव्य रचना हेतु नोबेल पुरस्कार से सम्मानित तथा बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगौर का चित्र
Rabindranath Tagore: एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, 7 मई 1861 को कोलकाता के प्रतिष्ठित 'जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी' (पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था, जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को मनाया जा रहा है।  वे एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार से थे, जिनके घर का वातावरण कला, साहित्य और संस्कृति से भरपूर था। रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक कवि नहीं थे। वे एक दार्शनिक, चित्रकार, संगीतकार, नाटककार और शिक्षाविद भी थे। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि कला और साहित्य की कोई सीमा नहीं होती।
 
 

नोबेल पुरस्कार और विश्वव्यापी पहचान

1913 में जब उनकी काव्य रचना 'गीतांजलि' (Gitanjali) के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला, तो वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय और पहले एशियाई बने। उनकी कविताओं में ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम झलकता है।
 

दो देशों की आवाज़: राष्ट्रगान का निर्माण

टैगोर दुनिया के इकलौते ऐसे कवि हैं, जिनकी रचनाएं दो अलग-अलग देशों का राष्ट्रगान बनीं। जो 24 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रीय गान घोषित किया गया। इस गीत में भारत की विविधता, संस्कृति और एकता का सुन्दर चित्रण है।
 
भारत का राष्ट्रगान: 'जन गण मन'
बांग्लादेश का राष्ट्रगान: 'आमार शोनार बांग्ला'
(इतना ही नहीं, श्रीलंका के राष्ट्रगान की प्रेरणा भी टैगोर के विचारों से ही मिली मानी जाती है।)
 

शांतिनिकेतन: शिक्षा का नया सवेरा

टैगोर किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रकृति के सानिध्य में सीखने पर जोर देते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने 'शांतिनिकेतन' (विश्व भारती विश्वविद्यालय) की स्थापना की। यहां खुले आसमान के नीचे, पेड़ों की छांव में गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी आधुनिक शिक्षा को एक नई दिशा देती है।
 

देशभक्ति और स्वाभिमान

टैगोर का हृदय जितना कोमल था, उनका स्वाभिमान उतना ही अडिग। 1919 में हुए भीषण जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई 'नाइटहुड' (सर) की उपाधि वापस लौटा दी थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि मानवता और देशप्रेम से बढ़कर कोई सम्मान नहीं है।
 

टैगोर का संगीत: 'रवींद्र संगीत'

उन्होंने लगभग 2,230 गीतों की रचना की, जिन्हें आज 'रवींद्र संगीत' के नाम से जाना जाता है। बंगाल के हर घर में और दुनिया भर के बंगाली समुदाय के लिए ये गीत उनकी संस्कृति की धड़कन हैं। बता दें कि रवींद्र संगीत या टैगोर गीत, रवींद्रनाथ टैगोर की रचनात्मक प्रतिभा से उत्पन्न एक अनूठी संगीत शैली है। जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ पश्चिमी संगीत और बंगाली लोक परंपराओं के तत्व शामिल हैं।
 

गुरुदेव का कालजयी संदेश

टैगोर मानते थे कि "मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।" उन्होंने संकीर्ण राष्ट्रवाद के बजाय 'विश्व-मानव' की कल्पना की, जहां पूरी दुनिया एक परिवार की तरह रहे।
 

साहित्यिक विस्तार

रवींद्रनाथ टैगोर को विश्व साहित्य में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास, गीत, और निबंधों की रचना की। उनका साहित्य केवल भारतीय नहीं, बल्कि वैश्विक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों जैसे 'काबुलीवाला', 'गोरा' और 'पोस्टमास्टर' आज भी विश्व साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं में गिनी जाती हैं।
 

टैगोर के जीवन से जुड़े 5 रोचक तथ्य:

उपनाम- महात्मा गांधी ने उन्हें 'गुरुदेव' की उपाधि दी थी।
टैगोर ने ही गांधी जी को 'महात्मा' कहकर पुकारा था।
आइंस्टीन से मिलन- 1930 में टैगोर और महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की मुलाकात हुई थी, जहां विज्ञान और धर्म पर लंबी चर्चा हुई।
चित्रकारी- उन्होंने 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंटिंग शुरू की और करीब 3,000 चित्र बनाए।
अनमोल विचार: "प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।" - रवींद्रनाथ टैगोर
 
रवींद्रनाथ टैगोर ने 7 अगस्त 1941 को इस नश्वर संसार को छोड़ दिया था, लेकिन उनके विचार और उनकी रचनाएं आज भी करोड़ों लोगों के जीवन में रोशनी भर रही हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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