जो कहते थे मफलर, खांसी
साथ नहीं दिया, कोई साथी
जोर आजमाइश की थी कितनी,
तड़पे पानी बिन, मछली जितनी,
सोच में पड़ गए, आज वो देखों,
जो कहते थे सुनों ओ मित्रों
जनता ने दे दिया हिसाब,
दिल्ली में फिर जीती आप
न चला मैजिक, न चली लहर
आम आदमी का था कहर
सबके सुर थे, सबके ताल
पांच साल केजरीवाल,