थोड़ी शराब पी है, समझता नहीं है इतना। आशिकी की क्या सजा है, सपनों में आज उसने। मेरे गालों पे किसकी है, लगता है मेरे गम में। थोड़ी शराब पी है, शर्म मुझको आती। मैं बोल नहीं पाती, मिलती है आंख जब-जब। मुस्कान छोड़ जाती,...