Select Your Language
अमृत रस बरसाए चंदा
भीकूलाल निमाड़े
झिलमिल खिली है चाँदनीनिकला है चाँद गोरा दूध नहाई लगै चाँदनीधरती दूध कटोरा हटा घटा का परदा लागै बड़ी सुहानी चाँदनी मदमस्ती बिखराए पागल प्रेमदीवानी चाँदनी नहीं कालिमा दिखे कहीं कहीं नहीं अंधियारा आज चाँदनी है मनभावन मौसम प्यारा-प्यारा देख चाँदनी को चंदाअमृत रस बरसाए खिलखिलाती चाँदनी और भी खिल जाएआओ हिन्दू, आओ मुस्लिम सिख,ईसाई आ जाएँ अमृत रस बरसाए चंदा मन मलिन धुल जाएँ बीती जाए रात सुहानी अवसर नहीं गँवाएँ रात का रोशन रूप निहारें अपने दीप जलाएँ। (
सौजन्य : नईदुनिया, इंदौर)