Select Your Language
अहसास का पीला वसंत
फाल्गुनी
इस बार जब वसंत आयानहीं जगा सका मेरे भीतर उस भीगे अहसास को जो उम्र के 16वें पड़ाव पर मेरी शहदिया आँखों से तुम्हारे लिए झरा था। नहीं बिखरे मेरी हथेलियों पर कच्चे टेसू, नहीं उड़ी मेरे सपनों के आसपासतुम्हारी स्मृतियों की शोख पीली तितली। नहीं खिले उमंगों के कचनार मेरे मन की सौंधी धरा पर। नहीं मचला मेरा दिल सरसों के लहलहाते खेत पर। बरसों पहले तुम एक मौसम की तरह बिना कोई आहट किए मेरी जीवन-बगिया में आए, कुछ देर ठहरे मुझ पर, मेरे सपनों के फूलों से उलझे और चुपचाप चले भी गए। तुम क्या गए मेरे मन के सारे मौसम बदरंग हो चले हैं। एक बार लौटकर आओ और मुझे अहसास का पीला वसंत देकर छोड़ जाओ हमेशा के लिए ताकि मैं प्यार कर सकूँ तुम्हारे बाद किसी और से। तुमसे ही पूछती हूँ क्यों आज भी तुम ही ढुलकते हो मेरी पलकों की गीली-गीली कोर से। तुम्हीं को भेजती हूँ वासंती हवा का एक झोंकामेरी याद में मुस्कुरा लेनानेह के उस छोर से।