रिमझिम बरसता हो पानी या गिरती हो आटे सी महीन फुहार घर की खिड़की से आँगन में उछलती बूँदें देखें सूँघें भुनी मक्की की भीनी खुशबू काले महीने में घर लौटी बहन से सुने सास की बातें बचपन दोहराएँ हँसते हुए रोएँ रोते हुए हँसें आओ बरसात देखें।
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घनघोर घटाओं में सहे बौछारों के बाण कच्चे घर की भीगती दीवारें कंधे भींगें, भीग कर सूखें फिर भींगें ऐसी भीगती रात में जागते हुए सोएँ सोते हुए जागें आओ बरसात देखें।