आना जल्दी तुम मेरे पाँव से
अनूप अशेष
एक पेड़ पूनम का एक पेड़ चाँदनी ले आना मेरे घर तुम अपने गाँव से। काली अँधियारी में एक चन्द्रमा उगा मावस के टीके को गाल में लगाना श्वेत-पुष्प की क्यारी आँचल में भरकर गोरे-गोरे पाँवों आलता रचाना धूप ना लगे ठंडी राहों से बचकर आ जाना, तुम बदली-बदली छाँव से। उस कदम्ब की कलियाँ केवड़े की बाँहें यादों में अब भी हैं परस-भरी नदियों में नावों से छोह-भरे दीपदान दर्पण में बूँदों सा उतरेआँगन के पिंजड़े में बैठी मैना उदास आना जल्दी तुम मेरे पाँव से, एक पेड़ पूनम का,एक पेड़ चाँदनी ले आना मेरे घर तुम अपने गाँव से।