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आया है नव वर्ष
राम नारायण 'हलधर'
दुल्हन-सा बेचैन मन,जागा सारी रात।नए वर्ष की द्वार पर,आ पहुँची बारात॥शहनाई पर "भैरवी",छेड़े कोई राग।या फूलों से तितलियाँ,लेकर उड़ीं पराग॥इतनी-सी सौगात ला,आने वाले साल।पीने को पानी मिले,सस्ता आटा-दाल॥भाषा, मजहब, प्रांत के,झगड़े और संघर्ष।तू ही आकर दूर कर,मेरे नूतन वर्ष॥ये बूँदें हैं ओस की,या मोती का थाल।आओ देखें गेहूँ के,खेतों में नव साल॥वो सरसों के खेत में,सपने, खुशियाँ, हर्ष।'
हलधर' अपने गाँव भी,आया है नव वर्ष॥नई भोर की रश्मियों,रुको हमारे देश।अंधियारों से आखिरी,जंग अभी है शेष॥