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जितेंद्र चौहान
इस धरती पर आने से पहले
मैं तो रहकर आया
अपमान के पाताल में
नाप आया उसका आकाश भी
अब भला तुम मुझे
क्या अपमानित करोगे
अपने गुस्से और नफरत से
जो कहना है कह लो
जो दिखाना है दिखाओ
अब मेरी आँखें और कान
मेरी आत्मा तक नहीं जाते
इस धरती पर आने के बाद
यदि कभी जाग जाए
तुम्हारे मन में
मेरे लिए प्यार
सताने लगे मेरी याद
याद करना मुझे इक बार
नींद में भी
चला आऊँगा
तुम्हारे पास
इस धरती पर आने के बाद।