हमें अपने इकलौते लड़के के लिए एक ऐसी बहू चाहिएजो दुनिया की सबसे अच्छी बहू हो और उसे ये बातकि वह दुनिया की सबसे अच्छी बहू है पता न हो।जिसे बोलना भले ही आता हो मगर हो वह गूँगी'
न' इस शब्द को पहचानती ही न होऔर 'हाँ' उसकी जुबान पर दरवाजे के बाहर हाथ बाँधे खड़े नौकर की तरह हो खड़ा।जिसके दोनों पैर तो साबुत हों मगर हो वह लँगड़ीन वह चलना जानती हो न दौड़नानाचना तो उसे बिलकुल न आता होऔर गुस्से में पैर पटकते तो उसे किसी ने देखा ही न हो।जिसके कान भले ही हों मगर उसे सिर्फहमारे घर के लोगों की आवाज के,बाहर की कोई आवाज सुनाई न देआँखें होने पर उनसे दूर तक देखने लायक होने के बाद भीउसकी घर से बाहर देखने की इच्छा ही न हो।जिसके पास डिग्रियाँ तो खूब होंलेकिन वह पढ़ी-लिखी न हो जरा भीदस्तखत करने के नाम पर वह आगे कर देती होअपने हाथ का स्याही लगा अँगूठाऔर अपनी डिग्रियों को महज कागज के टुकड़े मानकर।खूबसूरत ऐसी कि सब उसे देखते रह जाएँ और हमसे बार-बार कहेंअपने लड़के के लिए क्या बहू ढूँढकर लाए हैं आपलेकिन वह न तो अपनी खूबसूरती बार-बारआईने में देखती हो और न ही खुद को हमारे घर कीसाधारण चेहरे वाली लड़कियों से अधिक सुंदर मानकर चले।जिसके पिता के घर के लोगहमारे घर को समय से बढ़करऔर सच से अधिक मानकर चलेंऔर यह बात बार-बार कहते रहेंआपके घर में अपनी लड़की देकर धन्य हो गए हमहम तो इस लायक थे भी नहीं।जिसे रोना बिलकुल न आता होचीखना तो वह जानती ही न होऔर उसकी पीठ ऐसी हो कि उस पर उभरते ही न हों नीले निशानउसके गालों पर छपती ही न हों उँगलियाँऔर वह पिटते समय बिलखती नहीं, हँसती हो।
चेहरे से जिसके पीड़ा झलके नहीं
दुःख दिखाई न दे जिसकी आँखों में
बातों में जिसकी कष्ट बजें नहीं।
जिसे हमें ढूँढने कहीं जाना न पड़े,
उसका पिता
नाक रगड़ता निहोरे करता हमारे घर आए
और हम उस पर करते हुए एहसान
बहू के रूप में उसकी बेटी को
अपने बेटे के लिए रख लें।