ज्योति जैन
मजदूरों को मिले मेहनत का धन
सुखी हो सारे किसान जन
अनपढ़ ना कोई रहने पाए
कसम आज हम सब मिल खाए
ऐसा नया साल आज हम मनाएँ
जाति भाव छोड़ सब आओ
प्रांत भाव भी भूल ही जाओ
सब मिलजुल कर रहें
आओ आगे यह देश बढ़ाएँ
फैल रहे चोरी और रिश्वत
रो रहे ईमानदार हिन्द जन
देश पर छा रहे संकट के घन
सब मिल आज ये संकट मिटाएँ
ऐसा नया साल आज मनाएँ।