इस तपते भूखंड पर उड़ती गर्म रेत के बीच जब मैं झुकूं नल पर तब ओ मेरी प्यास मुझे मत करना कमजोर पियूं तो एक चुल्लू कम कि याद रहे दूसरों की प्यास ओ मेरी भूख मुझे देना ताकत खाऊं तो एक कौर कम कि याद रहे दूसरों की भूख सोऊं तो एक पहर कम रात-रात भर जागकर खटते कामगारों के लिए ओ मेरी नींद।