Hindi Poems %e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88 %e0%a4%94%e0%a4%b0 110020700041_1.htm

rashifal-2026

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कोई और !

काव्य-संसार

Advertiesment
हमें फॉलो करें सुशान्त सुप्रिय
सुशान्त सुप्रिय
ND
एक सुबह उठता हूँ
और हर कोण से
खुद को पाता हूँ
अजबनी
आँखों में पाता हूँ
एक अजीब परायापन
अपनी मुस्कान लगती है
न जाने किसकी
बाल हैं कि पहचाने नहीं जाते
अपनी हथेलियों में
किसी और की रेखाएँ पाता हूँ
मनोवैज्ञानिक बताते हैं
कि ऐसा भी होता है
हम जी रहे होते हैं
किसी और का जीवन
हमारे भीतर कोई
और जी रहा होता है...।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi