काश, कोई दिन ऐसा भी आ जाए अखबार जब केवल खुशियाँ बरसाए न हो कोई खबर किसी अस्मत के लूटने की न किसी सितारे के, असमय टूटने की न ताल सूखने की खबर हो न आस टूटने की न हो भ्रष्टाचार की कोई बात न आग, न फाँसी न जहरखुरानी की खबर हो चले नहीं हों चाकू और छुरे
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और न किसी की गर्दन कटी हो न चैन छीना हो किसी का न चेन लूटी हो बस खबर हो तो फूलों की मुस्कुराते बच्चों की मुराद पूरी होने की खबर हो काश, कोई दिन ऐसा भी आ जाए जब सारा अखबार ही सकारात्मक नजर आए।